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बदलेगा बुंदेलखंड… रोड, मेडिकल कॉलेज, उद्योग, सिंचाई, टाइगर रिजर्व सबके लिए विकास का प्रण

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को खजुराहो के महाराजा छत्रसाल कन्वेंशन सेंटर में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में बुंदेलखंड के औद्योगिक विकास और रोजगार संपन्न बनाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, सड़कों के निर्माण सहित नौरादेही अभ्यारण्य में चीता के रहवास के लिए विकास कार्यों को स्वीकृति जैसे अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गये. मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मंत्रि-परिषद के सदस्यों ने बुंदेलखंड के विकास पर केंद्रित विकास के महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने पर करतल ध्वनि से स्वागत किया गया. बैठक में छतरपुर और दमोह के मेडिकल कालेजों में पदों की स्वीकृति सहित शासकीय चिकित्सालयों के उन्नयन और नवीन पदों के सृजन को भी स्वीकृति दी गई. मोहन यादव के नेतृत्व में मंत्रि-परिषद ने बुंदेलखंड क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से सागर के औद्योगिक क्षेत्र ‘मसवासी ग्रंट’ के लिए एक विशेष औद्योगिक प्रोत्साहन पैकेज को मंजूरी दी. स्वीकृति अनुसार भूमि प्रब्याजी और वार्षिक भू-भाटक की दर केवल एक रुपये प्रति वर्गमीटर निर्धारित की है. इसके अतिरिक्त, विकास शुल्क चुकाने के लिए 20 समान वार्षिक किश्तों की सुविधा दी गई है और संधारण शुल्क 8 रुपये प्रति वर्गमीटर वार्षिक तय किया गया है. निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए स्टाम्प और पंजीयन शुल्क में 100% प्रतिपूर्ति की स्वीकृति दी गई है. साथ ही, इकाइयों को वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने की तारीख से पांच वर्षों तक विद्युत शुल्क में छूट दी गई है. वित्तीय सहायता पैकेज के तहत वृहद श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों पर उद्योग संवर्धन नीति 2025 और निवेश प्रोत्साहन योजना 2025 के नियम लागू होंगे, जबकि एमएसएमई इकाइयों के लिए एमएसएमई विकास नीति-2025 और एमएसएमई प्रोत्साहन योजना-2025 के प्रावधान प्रभावी होंगे. सीमेंट निर्माण इकाइयों को इस विशेष वित्तीय सहायता पैकेज का लाभ नहीं मिलेगा. यह विशेष पैकेज आगामी पांच वर्षों के लिए प्रभावशील रहेगा. मंत्रि-परिषद द्वारा सागर-दमोह मार्ग, लंबाई 76.680 किमी 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर के साथ हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के अंतर्गत उन्नयन एवं निर्माण के लिए परियोजना वित्तीय लागत 2,059 करोड़ 85 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई. स्वीकृति अनुसार लागत का 40% हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल के अंतर्गत मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा राज्य राजमार्ग निधि से जीएसटी सहित वहन किया जाएगा. शेष 60% राशि का प्रावधान संचालन अवधि में 15 वर्षों तक 6 माही एन्युटी के रूप में राज्य बजट के माध्यम से किया जाएगा. इसके अतिरिक्त भू अर्जन एवं अन्य कार्यों के लिए 323 करोड़ 41 लाख रूपये का भुगतान भी राज्य बजट से किया जाएगा. परियोजना अंतर्गत 13 अंडरपास, 3 वृहद पुल, 9 मध्यम पुल, एक आरओबी, 13 वृहद जंक्शन और 42 मध्यम जंक्शन का निर्माण किया जायेगा.मंत्रि-परिषद द्वारा नवीन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय दमोह, छतरपुर और बुधनी के संचालन के लिए 990 नियमित और 615 आउटसोर्स पदों की स्वीकृति दी गई है. स्वीकृति अनुसार प्रत्येक चिकित्सा महाविद्यालय में 330 नियमित पद सृजन और 205 व्यक्तियों को आउटसोर्स पर नियोजित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई. मंत्रि-परिषद द्वारा सागर में वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व नौरादेही को चीतों के तीसरे रहवास के रूप में विकसित करने के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई है उल्लखेनीय है कि सितंबर 2022 में कुनो राष्ट्रीय उद्यान श्योपुर में पहला और अप्रैल 2025 में गांधी सागर अभयारण्य मंदसौर में दूसरा चीता रहवास प्रारंभ किया गया है. मध्यप्रदेश में वर्तमान में कुल 31 चीते हैं. कुनो राष्ट्रीय उद्यान श्योपुर में 28 और गांधी सागर अभयारण्य मंदसौर 02 चीतों का रहवास है. इसके अतिरिक्त जनवरी 2026 में बोत्सवाना से 8 चीते कुनो में पहुंचना संभावित है. मंत्रि-परिषद द्वारा दमोह जिले की तेंदूखेड़ा तहसील की झापननाला मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 165 करोड़ 6 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है. परियोजना के तहत तेंदूखेड़ा तहसील के 17 ग्रामों का कुल 3600 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा. मंत्रि-परिषद ने 11 जिलों की 12 स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है. निर्णय अनुसार नीमच जिले के भादवामाता उप स्वास्थ्य केंद्र को 30 बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन किया जाएगा. शाजापुर के मक्सी स्थित 6 बिस्तरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का उन्नयन 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल में किया जाएगा. इसी प्रकार, उज्जैन के जीवाजीगंज और खंडवा के ओंकारेश्वर स्थित 20 बिस्तरीय सिविल अस्पतालों का विस्तार कर उन्हें 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल बनाया जाएगा. इसके अतिरिक्त पन्ना के अजयगढ़, खरगौन के महेश्वर, सिंगरौली के देवसर और रीवा के हनुमना स्थित 30 बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को 50 बिस्तरीय सिविल अस्पतालों में अपग्रेड किया जाएगा. बड़े उन्नयन कार्यों में बैतूल के भीमपुर, सिंगरौली के चितरंगी और अनूपपुर के कोतमा स्थित 30 बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को 100 बिस्तरीय सिविल अस्पतालों में बदलना शामिल है. साथ ही, सागर जिले के बीना स्थित 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल का उन्नयन कर उसे 100 बिस्तरीय किया जाएगा. इन संस्थाओं के संचालन के लिए मंत्रि-परिषद ने 345 नियमित और 03 संविदा पदों के सृजन को मंजूरी दी है. साथ ही 136 व्यक्तियों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से रखने की स्वीकृति भी दी गई है. इस पूरी प्रक्रिया 27 करोड़ 17 लाख रुपये का वार्षिक व्यय किया जायेगा.

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