बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को मकर संक्रांति के अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के आवास पर आयोजित दही–चूड़ा भोज में शामिल हुए। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत राज्य सरकार के कई मंत्री भी मौजूद थे। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई। मकर संक्रांति का बिहार की राजनीति में भी विशेष महत्व है। जनप्रतिनिधियों द्वारा आयोजित दही–चूड़ा भोज आम जनता से सीधा संवाद स्थापित करने का अवसर बनते हैं। उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा हर वर्ष मकर संक्रांति पर दही–चूड़ा भोज का आयोजन करते हैं। एक दिन पहले सोमवार को उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र लखीसराय में भी भव्य भोज दिया, जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया। सिन्हा के अनुसार ऐसे आयोजनों के माध्यम से जहां एक ओर लोकपरंपराएं जीवंत रहती हैं, वहीं दूसरी ओर सामाजिक और राजनीतिक संवाद को भी मजबूती मिलती है। बिहार में मकर संक्रांति केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक मानी जाती है। इस दिन दही–चूड़ा, तिलकुट और मिठाइयों का सेवन पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है। दही–चूड़ा बिहार की भोज्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, जो सादगी, समानता और सामूहिकता के भाव को दर्शाता है। गांव से लेकर शहर तक, हर वर्ग के लोग इस पर्व को समान उत्साह से मनाते हैं। बिहार में मकर संक्रांति इस वर्ष 2026 में 14 और 15 जनवरी को मनाई जाती है। यह वह दिन है जब सूर्य खगोलीय रूप से धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेगा, जिसे संक्रांति के रूप में माना जाता है। कुछ परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार पुण्यकाल या उत्सव 15 जनवरी तक चलता है, लेकिन ज्योतिष एवं पंचांग के अनुसार मुख्य संक्रांति का दिन 14 जनवरी ही है। हालांकि इस वर्ष मकर संक्रांति बिहार के अधिकांश जिलों में 15 जनवरी को है।
