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ऊर्जा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की मजबूत उड़ान

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता, कुशल प्रबंधन और दूरदर्शी योजनाओं के कारण छत्तीसगढ़ आज देश के प्रमुख ऊर्जा राज्यों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। वर्तमान मांग की सफल आपूर्ति के साथ-साथ आने वाले वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार बड़े और दीर्घकालिक निवेश कर रही है। मुख्यमंत्री श्री साय की पहल पर छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी लिमिटेड ने बिजली उत्पादन और नई परियोजनाओं के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों से यह स्पष्ट है कि राज्य ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में मजबूत और संतुलित रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी ने अक्टूबर 2025 में 1528.181 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया। वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 में अक्टूबर तक कुल 10847.303 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन दर्ज किया गया। यह आंकड़े बताते हैं कि राज्य के ताप विद्युत गृह उच्च दक्षता के साथ लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में 1 अप्रैल से 31 अक्टूबर 2025 तक देशभर के ताप विद्युत गृहों का औसत प्लांट लोड फैक्टर 63.58 प्रतिशत रहा, जबकि छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी ने 72.41 प्रतिशत पीएलएफ हासिल किया। यह प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर है और इसी के साथ देश के 33 राज्य विद्युत उपक्रमों में छत्तीसगढ़ को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है। ऊर्जा विशेषज्ञ इसे बेहतर प्रबंधन, कोयला आपूर्ति की मजबूती और तकनीकी दक्षता का परिणाम मान रहे हैं। भविष्य की बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने कोरबा पश्चिम में 2×660 मेगावाट सुपर क्रिटिकल ताप विद्युत परियोजना को हरी झंडी दे दी है। इस परियोजना को राज्य शासन से प्रशासनिक स्वीकृति और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से पर्यावरणीय मंजूरी मिल चुकी है। परियोजना के लिए मेसर्स बीएचईएल को 13,990 करोड़ रुपये (कर सहित) का कार्यादेश 3 अप्रैल 2025 को जारी किया गया। इसके तहत 549.03 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान 5 अप्रैल 2025 और 329.41 करोड़ रुपये का भुगतान 19 सितंबर 2025 को किया गया। बीएचईएल द्वारा आयातित फोर्जिंग, कास्टिंग सहित आवश्यक उपकरणों के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं। साथ ही, भूमि समतलीकरण, भंडार भवन निर्माण और आधार स्तंभ निर्माण जैसे प्रारंभिक सिविल कार्य भी शुरू हो चुके हैं। परियोजना के वित्तपोषण के लिए 26 सितंबर 2025 को छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन के बीच 12,640 करोड़ रुपये का ऋण अनुबंध हुआ है। दोनों इकाइयों को वर्ष 2029 और 2030 में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य में पंप स्टोरेज आधारित जल विद्युत परियोजनाओं के लिए नीति लागू होने के बाद 5 स्थलों-हसदेव बांगो, रौनी, दनगरी, सिकासेर और कोटापाली-की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है। इन सभी परियोजनाओं को भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से टीओर प्राप्त हो चुका है। टीओर जारी होने के बाद अब डीपीआर तैयार करने के लिए अन्वेषण कार्य प्रगति पर है। हसदेव बांगो, रौनी और सिकासेर परियोजनाओं के लिए केन्द्रीय विद्युत अभिकरण के एचपीपीआई विभाग के साथ पहली परामर्श बैठक भी हो चुकी है, जिससे डीपीआर प्रक्रिया को गति मिली है। पंप स्टोरेज परियोजनाओं के विकास के लिए राज्य ने एनटीपीसी, टीएचडीसी और एसजेवीएन के साथ संयुक्त उपक्रम के तहत 10 मार्च 2025 को एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा हसदेव बांगो और कुरूंद परियोजनाओं के लिए 6 अगस्त 2025 को एनएचपीसी  के साथ एमओयू किया गया है। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए ज्वांइट वेन्चर एग्रीमेंट तैयार करने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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