पटना लिटरेरी फेस्टिवल (पीएलएफ) द्वारा आयोजित “एलीट नशिस्त- की 6 छठी संस्करणः दिल की शायरी महफिल” का भव्य एवं गरिमामय आयोजन गत दिनों कोलकाता में रोटरी सदन ऑडिटोरियम, चैरंगी, कोलकाता में संपन्न हुआ। इस अवसर पर देश के विभिन्न शहरों से आए प्रतिष्ठित शायरों, कवियों, साहित्यकारों एवं कला प्रेमियों ने भाग लेकर शायरी, गजलों और साहित्यिक संवादों के माध्यम से अदब की समृद्ध परंपरा को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। कार्यक्रम का उद्देश्य उर्दू भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करना तथा नई पीढ़ी को शायरी और साहित्य से जोड़ना था। महफिल में प्रस्तुत उत्कृष्ट शेर-ओ-शायरी ने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वक्ताओं ने साहित्य, भाषा और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया। महफिल में देश के ख्यातिप्राप्त शायरों और कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। इनमें प्रमुख रूप से शारिक काफी, नदीम फारूक, आदिल रशीद, डॉ. तिश्या श्री, प्रेरणा प्रताप, रुबीना अयाज, आनस फैजी, शहीद नूर तथा नगमा नूर शामिल थे। उनकी प्रभावशाली प्रस्तुतियों को श्रोताओं ने खूब सराहा। कार्यक्रम में खुर्शीद अहमद, अब्दुर रहमान, सुभोदीप बोस, सैय्यद अहमद खुर्शीद, राजीव सोनी, अफजल, ख्वाजा मोहम्मद सहित कोलकाता और देश के विभिन्न हिस्सों से आए लगभग 125 साहित्य प्रेमियों, कवियों, शायरों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों ने सहभागिता कर अदब और कविता की इस यादगार शाम का आनंद लिया। इस अवसर पर उपस्थित साहित्यकारों और अतिथियों ने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल साहित्यिक अभिरुचि को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि समाज में सांस्कृतिक सौहार्द, संवाद और रचनात्मक चेतना को भी सुदृढ़ बनाते हैं। उन्होंने पटना लिटरेरी फेस्टिवल की इस सार्थक पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के निरंतर आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की। कार्यक्रम के अंत में खुर्शीद अहमद सचिव पटना लिटरेरी फेस्टिवल ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, कवियों, शायरों और साहित्य प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा आने वाले समय में और भी व्यापक स्तर पर साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के आयोजन का संकल्प दोहराया।
