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निःशुल्क ऑपरेशन, दवा, जांच और विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखभाल से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मिल रही बड़ी राहत।

किशनगंज  प्रसव केवल एक सामान्य चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि ऐसा समय होता है जब कुछ मिनटों का निर्णय मां और नवजात दोनों के जीवन को सुरक्षित या संकटग्रस्त बना सकता है। जब प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, प्रसव में रुकावट, गर्भस्थ शिशु की असामान्य स्थिति या उच्च रक्तचाप जैसी जटिलताएं सामने आती हैं, तब तत्काल सिजेरियन ऑपरेशन ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी विकल्प होता है। यदि ऐसे समय में अस्पताल में चौबीसों घंटे सिजेरियन सुविधा उपलब्ध न हो और गर्भवती महिला को दूसरे अस्पताल रेफर करना पड़े, तो उपचार में होने वाली देरी मातृ एवं नवजात मृत्यु का कारण बन सकती है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग एफआरयू (फर्स्ट रेफरल यूनिट) और जिला अस्पतालों में 24×7 जीवनरक्षक सिजेरियन सेवाओं को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दे रहा है। इसका उद्देश्य केवल ऑपरेशन की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि रात में जीवनरक्षक सिजेरियन सेवा उपलब्ध नहीं होने के कारण किसी भी महिला की जान न जाए।किशनगंज सदर अस्पताल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरा है, जहां चौबीसों घंटे उपलब्ध आपातकालीन प्रसूति सेवाओं ने न केवल जटिल गर्भावस्था वाली महिलाओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराया है, बल्कि अनावश्यक रेफरल में भी उल्लेखनीय कमी लाई है। इससे गरीब परिवारों का आर्थिक बोझ कम हुआ है और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। जब रात में ही करनी पड़ी सिजेरियन, समय पर उपचार ने बचाई दो जिंदगियां कोचाधामन प्रखंड की रहने वाली नाजिया खातून को देर रात प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिवार उन्हें तत्काल सदर अस्पताल लेकर पहुंचा। जांच के बाद चिकित्सकों ने बताया कि सामान्य प्रसव संभव नहीं है और मां तथा बच्चे दोनों की सुरक्षा के लिए तत्काल सिजेरियन ऑपरेशन करना आवश्यक है। नाजिया याद करते हुए कहती हैं की हमें सबसे ज्यादा डर इस बात का था कि कहीं रात होने के कारण हमें दूसरे अस्पताल न भेज दिया जाए। हमारे पास निजी अस्पताल जाने के पैसे भी नहीं थे। लेकिन डॉक्टरों ने तुरंत ऑपरेशन की तैयारी शुरू कर दी। कुछ ही समय में मेरा सफल सिजेरियन हुआ और मेरा बच्चा सुरक्षित पैदा हुआ। अगर उस रात हमें रेफर कर दिया जाता, तो रास्ते में क्या होता, इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। आज मैं हर गर्भवती महिला से कहती हूं कि समय पर अस्पताल पहुंचना और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा करना सबसे बड़ा निर्णय है। उनके पति ने भी बताया कि निःशुल्क ऑपरेशन, दवा, जांच और भर्ती की सुविधा ने आर्थिक संकट के बीच उनके परिवार को बड़ी राहत दी। समय पर सिजेरियन कई मामलों में जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर होता है स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. शबनम यास्मीन ने कहा कि प्रसव संबंधी कई जटिलताओं में प्रत्येक मिनट महत्वपूर्ण होता है। यदि सिजेरियन में अनावश्यक विलंब होता है, तो मां और नवजात दोनों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।उन्होंने कहा की हमारा प्रयास है कि कोई भी गर्भवती महिला केवल इसलिए जोखिम में न पड़े कि रात के समय जीवनरक्षक सिजेरियन सेवा उपलब्ध नहीं थी। जिला अस्पताल और एफआरयू स्तर पर चौबीसों घंटे सिजेरियन सेवाएं उपलब्ध होने से अनावश्यक रेफरल कम होते हैं, उपचार समय पर शुरू होता है और मातृ एवं नवजात मृत्यु की संभावना में कमी आती है। सुरक्षित मातृत्व हर महिला का अधिकार है, सुविधा नहीं।उन्होंने बताया कि अस्पताल में प्रशिक्षित प्रसूति विशेषज्ञ, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, ब्लड बैंक, नवजात शिशु देखभाल इकाई, ऑपरेशन थिएटर और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता जटिल मामलों के त्वरित प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य केवल संस्थागत प्रसव बढ़ाना ही नहीं  बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर जटिल गर्भावस्था में समय पर आपातकालीन प्रसूति सेवाएं उपलब्ध हों। उन्होंने आगे कहा की एफआरयू और जिला अस्पतालों में 24×7 सिजेरियन सेवाओं को मजबूत करने से गर्भवती महिलाओं को अनावश्यक रूप से दूसरे अस्पतालों में भेजने की आवश्यकता कम होती है। इससे उपचार में होने वाली देरी रुकती है और कई मामलों में मां तथा नवजात दोनों की जान बचाई जा सकती है। हमारा स्पष्ट संदेश है कि रात में जीवनरक्षक सिजेरियन सेवा उपलब्ध नहीं होने के कारण किसी भी महिला की जान नहीं जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए निःशुल्क सिजेरियन, दवा, जांच और विशेषज्ञ देखभाल यह सुनिश्चित करती है कि गरीबी किसी महिला के सुरक्षित मातृत्व में बाधा न बने। सुरक्षित मातृत्व की दिशा में मजबूत कदम सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ अनवर हुसैन ने बताया  कि मातृ मृत्यु के अधिकांश कारणों को समय पर पहचान और त्वरित आपातकालीन प्रसूति सेवाओं के माध्यम से रोका जा सकता है। जिला अस्पतालों और एफआरयू में चौबीसों घंटे जीवनरक्षक सिजेरियन सेवाओं की उपलब्धता इसी दिशा में एक निर्णायक कदम है। किशनगंज में मजबूत होती यह व्यवस्था स्पष्ट संदेश देती है कि सुरक्षित मातृत्व केवल स्वास्थ्य सेवा का लक्ष्य नहीं, बल्कि प्रत्येक महिला का अधिकार है। जब उपचार समय पर मिलता है, रेफरल कम होते हैं और सेवाएं दिन-रात उपलब्ध रहती हैं, तभी यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि कोई भी महिला केवल इसलिए अपनी जान न गंवाए क्योंकि रात में जीवनरक्षक सिजेरियन सेवा उपलब्ध नहीं थी।यह संस्करण नीति, जनस्वास्थ्य और मानवीय कहानी—तीनों का संतुलन रखता है और राष्ट्रीय स्तर के समाचार-पत्रों की शैली के अधिक निकट है।
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