टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद दोबारा पद संभालने से इनकार कर दिया है। वे 20 फरवरी 2027 तक अपने वर्तमान कार्यकाल में चेयरमैन बने रहेंगे। चंद्रशेखरन ने बुधवार को टाटा संस के बोर्ड को अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह कार्यकाल खत्म होने के बाद पुनर्नियुक्ति के लिए अपना नाम आगे नहीं रखेंगे। इसके साथ ही टाटा समूह में लंबे समय से चल रही नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता पर विराम लग गया है। चंद्रशेखरन के मुताबिक, टाटा संस के प्रमुख शेयरधारक सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से उनके कार्यकाल को पांच साल के लिए बढ़ाने की सिफारिश की थी। इस प्रस्ताव को टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रिम्यूनरेशन कमेटी और बोर्ड के सामने भी रखा गया था। 24 फरवरी को हुई बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई, लेकिन एक बोर्ड सदस्य के समर्थन नहीं देने के कारण इसे मंजूरी नहीं मिल सकी। चंद्रशेखरन ने कहा कि सर्वसम्मति नहीं बनने की स्थिति में उन्होंने इस फैसले को टालने का विकल्प चुना था। उनके अनुसार, इसके बाद करीब छह महीने तक इस मुद्दे पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि टाटा संस इस समय कई महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजनाओं की निगरानी कर रही है और ऐसे में कंपनी के नेतृत्व को लेकर स्पष्टता बेहद जरूरी है। इसी वजह से उन्होंने अब खुद ही पुनर्नियुक्ति की दौड़ से बाहर होने का फैसला किया है। उन्होंने बोर्ड से जल्द नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया, ताकि नेतृत्व परिवर्तन सुचारू तरीके से हो सके। चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेद की खबरें भी सामने आती रही हैं। फरवरी में रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव का विरोध किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, नोएल टाटा चाहते थे कि टाटा संस को भविष्य में कभी भी शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं किया जाए, जबकि चंद्रशेखरन इस तरह की प्रतिबद्धता देने के पक्ष में नहीं थे। अब चंद्रशेखरन के फैसले के बाद टाटा संस को नए चेयरमैन की तलाश करनी होगी।
एन चंद्रशेखरन का टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा, 2017 में बने थे टाटा संस के प्रमुख
