तिरुवनंतपुरम को एक बार फिर विराट कोहली, शुभमन गिल और टीम इंडिया ने यादगार सौगात दी है. करीब साढ़े 3 साल बाद फिर इस शहर को वनडे मैच आयोजित करने का मौका मिला और टीम इंडिया ने इसे फिर से खास बना दिया. वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज के पहले ही मैच में टीम इंडिया ने 8 विकेट से जीत दर्ज की. वेस्टइंडीज ने जस्टिन ग्रीव्स के शतक के दम पर 295 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया था. मगर कोहली और कप्तान गिल के शतकों के आगे ये स्कोर बौना ही साबित हुआ. इस तरह टीम इंडिया ने 3 मैच की सीरीज में 1-0 की बढ़त भी ले ली. ग्रीनफील्ड स्टेडियम में रविवार 27 सितंबर को खेले गए इस मुकाबले में शतकों की बारिश हुई और फैंस का जमकर एंटरटेनमेंट हुआ. मगर इन शतकों के बीच टीम इंडिया के स्टार स्पिनर कुलदीप यादव (4/40) ने अपनी ‘चाइनामैन’ गेंदबाजी का कहर बरपाया. उनके अलावा कोई भी गेंदबाज इस मैच में असर नहीं डाल सका और यही सबसे बड़ा अंतर साबित हुआ. खास तौर पर जब वेस्टइंडीज के सलामी बल्लेबाजों ने शतकीय साझेदारी कर टीम इंडिया को दबाव में डाला, तब कुलदीप ने ही वापसी कराई. जॉन कैंपबेल और जस्टिन ग्रीव्स ने आते ही भारतीय बल्लेबाजों पर हमला बोल दिया. दोनों ने अपने अर्धशतक पूरे किए और फिर शतकीय साझेदारी भी की, जो भारत में किसी भी विंडीज जोड़ी की 24 साल बाद ऐसी पार्टनरशिप थी. मगर जैसे ही कुलदीप ने कैंपबेल (62) को आउट कर साझेदारी को तोड़ा, भारतीय टीम ने दमदार वापसी की. मगर दूसरी ओर से ग्रीव्स जमे रहे और पहला ODI शतक जमाया. मगर 198 रन तक ग्रीव्स (101) समेत 5 विकेट गिर गए थे, जिसमें से 4 कुलदीप ने ही लिए. आखिरी ओवरों में आमिर जांगू ने ताबड़तोड़ 58 रन बनाकर टीम को ठीक-ठाक स्थिति में पहुंचाया. फिर टीम इंडिया के लिए भी कप्तान गिल और रोहित शर्मा ने अच्छी शुरुआत की और 74 रन की साझेदारी की. लेकिन रोहित (32) एक जीवनदान का फायदा नहीं उठा सके. मगर जीवनदान गिल को भी मिला और उन्होंने इसका पूरा फायदा उठाया. भारतीय कप्तान ने ODI में अपनी अच्छी फॉर्म को जारी रखते हुए शानदार शतक लगाया, जो वेस्टइंडीज के खिलाफ उनका पहला और कुल 10वां शतक था. इस दौरान उन्होंने कोहली के साथ 151 रन की साझेदारी की. गिल तो 110 रन (13 चौके, 1 छक्का) बनाकर आउट हो गए लेकिन कोहली नहीं रुके.पूर्व भारतीय कप्तान ने सबसे पहले तो अपना अर्धशतक छक्का जमाकर पूरा किया और फिर 15000 वनडे रन का आंकड़ा भी छुआ. मगर इसके बाद तो उनके तेवर और तीखे हो गए और उन्होंने बाउंड्री बटोरने पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान दिया. यहां तक कि अर्धशतक की ही तरह अपना शतक भी कोहली ने छक्का जमाकर 74 गेंदों में पूरा किया और इसके बाद भी छक्कों की बारिश की. आखिरकार सिर्फ 88 गेंदों में 139 रन (10 चौके, 9 छक्के) की नाबाद पारी के दम पर कोहली ने भारत को 41.4 ओवर में ही जीत दिला दी. उन्होंने लगातार 2 छक्कों के साथ लक्ष्य तक पहुंचाया.
