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आकाशवाणी भवन के अंदर बैठे राहुल और प्रियंका, हिरासत में अखिलेश-अभिषेक,

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन ने आर-पार की लड़ाई शुरू कर दी है. पिछले हफ्ते से चल रहे बैठकों के लंबे दौर के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन की रणनीति पर अंतिम मुहर लगा दी है. यह मुद्दा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है और इसे सोशल मीडिया व युवाओं (जेन-जी) के बीच सक्रिय विभिन्न तबकों का भी समर्थन मिल रहा है. विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर रोक लगाने और मतपत्र से चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं.इंडिया गठबंधन के तमाम सांसद मंगलवार को संसद भवन के मकर द्वार पर एकजुट हुए और वहां से पैदल मार्च निकालते हुए सीधे निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग मुख्यालय) का घेराव करने के लिए आगे बढ़ गए. विपक्षी सांसदों के इस कड़े रुख को देखते हुए संसद से लेकर निर्वाचन सदन तक सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की जा रही है. हालांकि, बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि दिल्ली पुलिस इस हाई-प्रोफाइल पैदल मार्च को संसद परिसर से कितनी दूर तक आगे बढ़ने की इजाजत देती है. चुनाव आयोग तक INDIA ब्लॉक के सांसदों के विरोध मार्च पर समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने कहा, “गणेश जी गलत कामों में मदद नहीं करते हैं. हम गणेश जी की पूजा से ही प्रार्थना शुरू करते हैं; वे हमारी रक्षा करेंगे.”  चुनाव आयोग तक INDIA ब्लॉक के सांसदों के विरोध मार्च पर समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा, “BJP संविधान की बात कैसे कर सकती है, जब वे 150 सांसदों को सस्पेंड कर देते हैं और कई कानून पास करते हैं? भारत के चुनाव आयोग की तरफ से सफाई देने वाली BJP कौन होती है?” INDIA ब्लॉक के सांसदों के विरोध मार्च पर कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा, “चुनाव आयोग ने जिस तरह से मताधिकार छीनने का काम किया है उसके खिलाफ आज राहुल गांधी की अगवाई में चुनाव आयोग के खिलाफ पूरा INDIA ब्लॉक प्रदर्शन करने जा रहा है. राहुल गांधी उसका नेतृत्व करेंगे. जब तक ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं होगा तब तक हम छोड़ेंगे नही  कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “इस देश में वोट का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण अधिकार है. ये देश के संविधान ने देश के लोगों को दिया है. उस अधिकार को अगर छीना जाएगा तो विपक्ष मूक दर्शक नहीं बनेगा…” विपक्ष के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में सुरक्षा बढ़ा दी है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 3,000 से ज़्यादा जवानों को तैनात किया गया है. ये विरोध प्रदर्शन जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किए जा रहे हैं. सुरक्षा इंतजामों के तहत, जिले में पुरुष जवानों की 27 कंपनियां और महिला जवानों की चार कंपनियाँ तैनात की गई हैं. आम तौर पर पुलिस की एक कंपनी में लगभग 100 से 115 जवान होते हैं.  इस मार्च में शामिल होने के लिए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के भी दिल्ली आने की उम्मीद है. उनकी पार्टी के कई सांसद पहले ही राजधानी पहुंच चुके हैं. लोकसभा में कांग्रेस के बाद समाजवादी पार्टी दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है, जिसके पास अभी 37 सीटें हैं. कांग्रेस इस मार्च में आम आदमी पार्टी और DMK की भागीदारी सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है और दोनों पार्टियों को निमंत्रण भी भेजा गया है. यह बात इसलिए भी अहम है क्योंकि दोनों ही पार्टियां औपचारिक रूप से ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं – हालांकि संसद के भीतर दोनों ही विपक्षी खेमे के साथ खड़ी हैं मुख्य विपक्षी पार्टी होने के नाते, कांग्रेस ने संसद के शीतकालीन सत्र तक इस मुद्दे को जनता के बीच जीवित रखने के लिए एक रोडमैप तैयार किया  हालांकि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी यही चाहेंगी कि फरवरी में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों तक यह मुद्दा अहम बना रहे, लेकिन उनकी मौजूदा रणनीति संसद के अगले सत्र तक इस गति को बनाए रखने पर केंद्रित है.
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