अरवल, बिहार में बढ़ते अपराध, पुलिस प्रशासन की कथित मनमानी, दलितों एवं गरीबों पर बढ़ते दमन और महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के विरोध में भाकपा-माले, इंसाफ मंच, ऐपवा एवं खेग्रामस के संयुक्त आह्वान पर राजव्यापी प्रतिरोध मार्च निकाला गया। अरवल में प्रतिरोध मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मार्च भाकपा-माले कार्यालय से प्रखंड कार्यालय तक पहुंचा। प्रतिरोध मार्च की अध्यक्षता भाकपा-माले जिला कमेटी सदस्य सुएब आलम ने की, जबकि मार्च का नेतृत्व भाकपा-माले जिला सचिव जितेंद्र यादव ने किया। प्रतिरोध मार्च को पूर्व विधायक महानंद सिंह ने संबोधित किया। इस मौके पर ऐपवा की लीला वर्मा, इंसाफ मंच के शाह शाद सहित कई नेताओं ने संबोधित किया। सभा को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक महानंद सिंह ने कहा कि सुशासन का दावा करने वाली सरकार में अपराधी बेलगाम हैं और पुलिस प्रशासन गरीबों पर डंडा चला रहा है, जबकि अमीरों की खुशामद की जा रही है। उन्होंने कहा कि पटना में दलितों के साथ कथित दुर्व्यवहार, महिलाओं के साथ अपमानजनक व्यवहार तथा बेतिया के ओरहिया में किशनगढ़ अंसारी की पुलिस हिरासत में हुई मौत जैसे मामलों ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। महानंद सिंह ने कहा कि भाजपा अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए बार-बार अतीत की सरकारों और 1990 के दशक का हवाला देती है, लेकिन आज बिहार और देश में गरीबी, भुखमरी तथा मजदूरों के पलायन को रोकने में सरकार विफल साबित हो रही है। भाजपा-आरएसएस की सरकार गरीबों, दलितों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने के बजाय उनके ऊपर दमन बढ़ा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि दलित और गरीब परिवारों को उनके घरों से बेदखल किया जा रहा है तथा शराबबंदी के नाम पर दलित परिवारों को पुलिसिया दमन का शिकार बनाया जा रहा है। इससे गरीब परिवारों का जीवन और आजीविका तबाह हो रही है। दूसरी ओर, भ्रष्टाचार बढ़ रहा है और गरीबों के लिए चलाई जाने वाली कल्याणकारी योजनाओं में लगातार कटौती की जा रही है।उन्होंने कहा कि गांव-गांव तक शिक्षा और रोजगार के अवसर पहुंचाने के बजाय नौजवानों के भविष्य को बर्बाद किया जा रहा है। सरकार की नीतियों के कारण आने वाली पीढ़ी के सामने भी गंभीर संकट खड़ा हो रहा है। जनता का गुस्सा सरकार के खिलाफ न भड़के, इसके लिए असली सवालों से ध्यान भटकाने की राजनीति की जा रही है। महानंद सिंह ने अरवल जिले के कलेर प्रखंड के पहलेजा गांव में दलित परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाए जाने की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीबों को उनके अधिकारों से वंचित करना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने वालिदाद में महादलित परिवार के ट्रक चालक की निर्मम हत्या का मामला उठाते हुए कहा कि राज्य में लूट, हत्या और बलात्कार जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने में सरकार और प्रशासन नाकाम हैं। दलितों, गरीबों, महिलाओं और मुस्लिमों पर अत्याचार एवं पुलिसिया दमन बंद किया जाए पुलिस हिरासत में हुई मौतों और दलितों के साथ दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
पहलेजा गांव में दलित परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाने के मामले की जांच कर प्रभावित परिवारों को न्याय दिया जाए।वालिदाद में महादलित परिवार के ट्रक चालक की हत्या के दोषियों को गिरफ्तार कर कड़ी सजा दिलाई जाए।गरीबों की कल्याणकारी योजनाओं में कटौती बंद कर शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी की जाए।बिहार में बढ़ते अपराध पर रोक लगाकर आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए प्रतिरोध मार्च के जरिय सरकार को चेतावनी दी गई कि यदि गरीबों, दलितों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बंद नहीं हुआ तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो लंबी आंदोलन किया जाएगा।
