मो बरकतुल्लाह राही
अरवल, 23नवंबर:भाकपा माले के राज्य कमेटी सदस्य एवं अरवल विधायक महानंद सिंह ने कहा है कि 26 से 28 नवंबर तक किसान मजदूर का महापडाव को सफल करने में अरवल से ज्यादा से ज्यादा संख्या में भाग ले ।
विदित हो कि किसान मजदूर महापदाव 26 से 28 नवंबर 2023 को देशव्यापी कार्यक्रम सभी राज्यपाल के समक्ष आयोजित है । इसे आफल बनाने में 21 से 24 तक संघर्ष यात्रा के बतौर हर शहर बाजारों में कार्यक्रम आयोजित है । किसानों को एमएससपी को कानूनी दर्जा दिए जाने, सीटू प्लस 50% एमएसपी का मूल्य निर्धारित किए जाने, चार श्रम कोड और निश्चित अवधि के रोजगार कानून को वापस लिए जाने, किसानों को पेंशन के रूप में ₹5000 दिए जाने समेत महंगाई-बेरोजगारी एवं अन्य तरह के समस्याओं के खिलाफ आज अरवल में प्रचार यात्रा निकाला गया ।
मेहंदिया में सभा को संबोधित करते हुए अरवल विधायक महानंद सिंह ने कहा कि किसानों को फसल उपजाने में जो लागत लगता है, उसका 50% जोड़कर सरकार को एमएसपी तय करना चाहिए । आज किसानों के उपजाए हुए अनाज का दाम का सही मूल्य नहीं मिल पाता है । स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट में C2 प्लस 50% का मतलब है कि खेती में जो भी लागत लगा, इसके अलावे भूमि का और परिवार के सदस्यों द्वारा खेती में सहयोग का मजदूरी जोड़कर लागत मूल्य निर्धारण किया गया है । उसके बाद लागत मूल्य का 50% ज्यादा सरकार को एमएसपी तय करना चाहिए ताकि किसानों का लाभकारी मूल्य पर फसल बिक सके ।
उन्होंने कहा कि आज किसानों के उपजाए हुए आलू का बाजार में चिप्स का कीमत पूंजीपतियों द्वारा अधिकतम मूल्य में बेचे जाते हैं, जबकि सरकार किसानों के अनाज का न्यूनतम मूल्य भी निर्धारित कर नहीं पाती है इसे कानूनी दर्जा दिया जाना चाहिए । जिस तरह से पूंजीपतियों के सारे सामान का कीमत सभी जगह पर एक होता है लेकिन किसानों के अनाज का मूल्य जगह-जगह अलग रहते हैं । पैक्स में उसका मूल्य अलग होता है, जबकि दुकान और मार्केट में अलग मूल्य होता है । यह कहीं से उचित नहीं है ।
उन्होंने कहा की 60 साल के बाद किसानों को 5000 पेंशन दिया जाना चाहिए । किसान मजदूर को पेंशन की गारंटी इसलिए जरूरी है कि अपने जीवन काल में अनाज उपजाकर पूरे देश की जनता का पेट भरने का काम करते हैं । जब वे लाचार हो जाते हैं तो उन्हें सरकार की जिम्मेदारी है कि वृद्धा पेंशन के रूप में किसान पेंशन 5000 किया जाना चाहिए
उन्होंने कहा कि कमर तोड़ महंगाई से किसान तबाह है । किसानों की स्थिति दयनीय है । बेरोजगारी चरम पर है । भाजपा की सरकार इन मुद्दों को सुलझाने के बजाय इसे और उलझाने में लगी है । सरकार की आलोचना करने वालों को देशद्रोह के मुकदमे किया जा रहे हैं लिहाजा भाजपा की मोदी सरकार के रहते हैं लोकतंत्र और संविधान अब बचना मुश्किल है ।लिहाजा, किसान मजदूर महापडाव में भारी संख्या में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करें और सरकार को पीछे हटने में सफल रहे । किसानों के हर सवाल को शिद्दत के साथ उठाने की जरूरत है इस मामले में भाकपा माले सबसे आगे है।
