अरवल,सामाजिक न्याय आंदोलन बिहार के नेतृत्व में अन्य बहुजन संगठनों के द्वारा यूजीसी रेगुलेशन पर सुप्रीम कोर्ट के स्टे पर असंतोष व्यक्त करते हुए प्रतिरोध मार्च किया गया. प्रखंड परिसर स्थित बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर प्रतिमा स्थल से मार्च निकाला गया और भगतसिंह चौक होते हुए शहर में भ्रमण के पश्चात सब्जी बाजार के पास प्रतिरोध सभा में तब्दील हो गया. प्रतिरोध सभा की अध्यक्षता करते हुए सामाजिक न्याय आंदोलन बिहार के सचिव सुबोध यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में बैठे सवर्ण जज कोई भगवान नहीं हैं.बल्कि सवर्ण लॉबी के दबाव में जाति पूर्वाग्रह से ग्रसित निर्णय ले रहें हैं और ‘यूजीसी रेगुलेशन’ पर रोक लगा दिया. आखिर इस तरह के निर्णय बहुजनों के मामले में ही क्यों होता है..? बिहार विधानसभा से विस्तारित बहुजन आरक्षण को इसी तरह फंसा करके रखा गया है.लेकिन असंवैधानिक EWS को लागू किया जा चुका है. जबकि यूजीसी के तरफ से जाति भेद-भाव व उत्पीड़न के मामलों में 118% की वृद्धि संबंधित रिपोर्ट है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट के द्वारा ही यूजीसी रेगुलेशन में और सख्त और व्यापक प्रावधान करने का निर्देश भी था. और निर्देश देने वाले बेंच में मुख्य न्यायाधीश ख़ुद भी थें. बेहद निराशाजनक सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी है . जिसमें रेगुलेशन पर रोक लगाते हुए कहा गया है कि इस रेगुलेशन से समाज में विभाजन का डर है.चीफ जस्टिस ने कहा कि इन नियमों के परिणाम बहुत व्यापक हो सकते हैं, जिससे “समाज में विभाजन” पैदा होने की आशंका है. विनियमों से समाज में दरार पड़ सकती है जो देश के लिए खतरनाक हो सकता है. सुनवाई के दौरान CJI ने अजीब मासूमियत के साथ कहा कि “पिछले 75 वर्षों में हमने जातिविहीन समाज बनाने की दिशा में जो कुछ भी हासिल किया है, क्या अब हम इस नीति के जरिए उल्टी दिशा में जा रहे हैं?” इस लिए अब ज़रुरी हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट में एससी-एसटी, ओबीसी के संख्या अनुपात में न्यायाधीश पदस्थापित किये जाएं .कोलेजियम समाप्त करो.समानता तभी हो सकता है.न्यायालयों सहित उच्च शैक्षणिक संस्थानों में कायम द्विज वर्चस्व को समाप्त करने और समानता स्थापित करने के लिए खाली पड़े तमाम पदों पर संख्या अनुपात में भर्ती करो. इसके लिए जाति जनगणना लाज़मी है.जनगणना में किसी तरह की जुमले बाजी और धांधली नहीं चलेगा.ओबीसी के जातियों का कॉलम जोड़ना होगा.इसके बिना जनगणना का क्या मतलब है..? जब स्पष्ट आंकड़े ही सामने न आये. हर हाल में रोहित एक्ट के तर्ज़ पर यूजीसी रेगुलेशन लागू करना होगा. यूजीसी द्वारा लाई गयी इक्विटी नियमावली रोहित वेमुला और डाक्टर पायल ताडवी की संस्थानिक हत्या के बाद जारी संघर्षो की उपलब्धि है. हम पीछे कतई नहीं हट सकते. ठोस व कारगर इक्विटी नियमावली के लिए लड़ेंगे. यूजीसी इक्विटी नियमावली के खिलाफ अगड़ी जाति की आक्रमकता आश्चर्यजनक है. कुलमिलाकर वे सदियों से जारी अपने विशेषाधिकारों को बनाए रखने के लिए संगठित तौर पर सामने आए हैं और अन्याय-उत्पीड़न व भेदभाव को अधिकार की तरह देखते हैं. हमारा मानना है कि बहुजनों को सम्मान, हर क्षेत्र में हर स्तर पर उचित हिस्सेदारी और बराबरी की लड़ाई को निर्णायक बनाना ही होगा, एकजुट होना ही होगा. यह संविधान बचाने और बाबा साहब के सपनों के भारत के निर्माण की जरूरी लड़ाई है. शहीद जगदेव प्रसाद के प्रति भी हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही है कि तमाम क्षेत्र में द्विज वर्चस्व के खिलाफ संघर्ष को व्यापक बनाएं. सभी वक्ताओं ने निम्नलिखित मांगों को बुलंद करते हुए अपनी बातें रखीं. जातीय भेदभाव व उत्पीड़न मुक्त कैम्पस के लिए यूजीसी इक्विटी नियमावली लागू करना होगा! निजी क्षेत्र और नीचे से ऊपर तक न्यायपालिका में एससी-एसटी व ओबीसी की आबादी के अनुपात में भागीदारी की गारंटी करो! असंवैधानिक EWS आरक्षण खत्म करो! एससी-एसटी व ओबीसी आरक्षण की लूट पर रोक लगाओ! जनगणना के फॉर्म में जाति का कॉलम जोड़ो ! जाति जनगणना की गारंटी करो ! बिहार विधानसभा से पारित 65 प्रतिशत आरक्षण को 9वीं अनुसूची में डालना होगा! सभा को RYA के नीतीश कुमार , छात्र नेता रितेश कुमार,राजनरायन चौधरी, जनार्दन यादव ,सुरज कुमार, सद्दाम हुसैन, संतोष कुमार, अमिताभ कुमार, दीपक कुमार,मनोज यादव,लक्ष्मण यादव ने संबोधित किया.
