मुंबई की लोकल ट्रेनें सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट सिस्टम नहीं, बल्कि शहर की लाइफलाइन मानी जाती हैं. हर दिन लाखों लोग इन ट्रेनों के भरोसे सफर करते हैं. ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे पुलिस ने अब कमर कस ली है. यात्रियों की सुरक्षा को और पुख्ता करने के मकसद से गवर्नमेंट रेलवे पुलिस यानी जीआरपी और रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स यानी आरपीएफ के साथ मिलकर मुंबई के सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों का सिक्योरिटी ऑडिट किया. इस दौरान कई गंभीर खामियां सामने आईं हैं, जिन पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. जीआरपी कमिश्नर राकेश कलासगर ने एनडीटीवी से बातचीत में बताया कि जांच के दौरान कई रेलवे स्टेशनों और रेलवे परिसरों में अवैध प्रवेश और निकास मार्ग पाए गए हैं. ये ऐसे रास्ते हैं, जहां से बिना किसी जांच के लोग स्टेशन परिसर में आ-जा सकते हैं. सुरक्षा के लिहाज से इन्हें बेहद खतरनाक माना गया है और इन्हें तत्काल बंद करने के निर्देश दिए गए हैं. सेंट्रल रेलवे के अंतर्गत आने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, दादर रेलवे स्टेशन और लोकमान्य तिलक टर्मिनस में कुल 12 अवैध एंट्री-एग्जिट प्वाइंट्स को चिह्नित किया गया है. इन्हें बंद करने के साथ-साथ सुरक्षा बढ़ाने के लिए 170 नए CCTV कैमरे, 80 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर और 11 बैग स्कैनर लगाने की सिफारिश की गई है. वहीं वेस्टर्न रेलवे के अंतर्गत आने वाले चर्चगेट रेलवे स्टेशन और ब्रांदा रेलवे स्टेशन और उनके आसपास 10 अवैध प्रवेश-निकास मार्ग पाए गए हैं. पश्चिम रेलवे को सुरक्षा के मद्देनजर 30 नए CCTV कैमरे, 40 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर और 8 बैग स्कैनर लगाने की सलाह दी गई है. सिर्फ स्टेशन की भौतिक सुरक्षा ही नहीं बल्कि स्टेशन परिसरों में मौजूद वेंडर्स को लेकर भी जीआरपी ने सख्ती दिखाई है. रेलवे को निर्देश दिए गए हैं कि सभी वेंडर्स का फ्रेश वेरिफिकेशन कराया जाए, ताकि यह साफ रहे कि स्टेशन परिसर में कौन काम कर रहा है और उसका बैकग्राउंड क्या है. जीआरपी अधिकारियों ने कहा कि इस पूरे सिक्योरिटी ऑडिट का मकसद मुंबई लोकल से सफर करने वाले हर यात्री को सुरक्षित महसूस कराना है. आने वाले दिनों में इन सुझावों पर अमल शुरू होने की उम्मीद है, जिससे मुंबई के रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत हो सके.
मुंबई के रेलवे स्टेशनों का GRP-RPF ने किया सिक्योरिटी ऑडिट, इन खामियों को दूर करने की सिफारिश
