असम को लेकर चुनाव आयोग की तैयारियां लगभग पूरी हो गई है. जानकारी के मुताबिक असम विधानसभा के चुनाव एक चरण में कराए जाएंगे. मार्च के पहले हफ्ते में असम में चुनाव आदर्श चुनाव संहिता लागू हो सकती है. जानकारी के मुताबिक, 4 मार्च से 8 मार्च के बीच चुनाव आयोग असम विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है. चुनाव की तारीखों के ऐलान और वोटिंग में कम से कम 25 दिनों का अंतराल रखा जाएगा. ऐसे में असम विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग अप्रैल के पहले हफ्ते यानी 3 अप्रैल से 7 अप्रैल के बीच में हो सकती है. असम चुनाव के लिए बीजेपी ने अभी से ही रणनीति बनाने शुरू कर दी है. सत्ताधारी बीजेपी असम में तीसरी बार सत्ता बरकरार रखने की कवायद में जुट गई है. पार्टी नेतृत्व ने चुनाव जीतने के लिए जरूरी तीन सबसे महत्वपूर्ण बातें लगभग तय कर ली है. जैसे मुख्यमंत्री हिमांता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में ही असम का चुनाव लड़ा जाएगा और एंटी इंकम्बेंसी की काट. पार्टी ने तय किया है कि 25 से 30 ऐसे विधायकों के टिकट काटे जाएंगे जिनकी रिपोर्ट ठीक नहीं है और जिनके खिलाफ शिकायतें है. जिस भी विधायक के खिलाफ थोड़ा भी एंटी इनकंबेंसी होगी, उसका टिकट काट दिया जाएगा. पार्टी इस बार 25 से 30 नए उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतार सकती है.असम बीजेपी ने चुनाव जिताने वाले मुद्दों को दो कैटेगरी में बांटा है. पहला व्यापक मुद्दे जिनका असम समेत देशव्यापी असर है. इसमें अवैध घुसपैठ, असम सरकार की विकास योजनाएं, मोदी सरकार द्वारा प्रदेश में की गई विकास योजनाएं, कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व खासकर गौरव गोगोई के पाकिस्तान से लिंक, हिंदुत्व और महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दे है. वहीं दूसरी तरफ माइक्रो यानि लोकल और जमीनी मुद्दों पर भी जोर शोर से काम हो रहा है. इसके लिए हिमंता सरकार ने गांव, ब्लॉक, जिले स्तर की लगभग 100 मुद्दों को चिन्हित कर उसका हल निकाला है. इसमें आंगनबाड़ी, चाय बागान , सरकारी कर्मचारी आदि हैं जिनके लिए किए गए काम पर वोट मांगे जाएंगे . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी चुनाव तारीखों के ऐलान के बाद 8 से 10 रैलियों के लिए समय मांगा गया है. पार्टी नेतृत्व को भरोसा है कि इस बार एनडीए को असम में 90 से 100 सीटें जीतने की पूरी संभावना है.
