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अब नफरती भाषण देने पर सख्त कानून, 10 साल की होगी सजा, इस राज्य की सरकार ने विधानसभा में पेश किया बिल

तेलंगाना में कांग्रेस सरकार ने रविवार को विधानसभा में हेट स्पीच को लेकर बिल पेश किया है. तेलंगाना घृणास्पद भाषण और घृणा अपराध (रोकथाम) विधेयक, 2026 पेश बिल में संबंधित अपराधों के लिए अधिकतम 10 वर्ष कारावास की सजा का प्रस्ताव है. बताया जाता है कि अगर यह विधेयक पारित हो जाता है तो तेलंगाना, कर्नाटक के बाद ऐसा कानून पारित करने वाला दूसरा राज्य बन जाएगा. तेलंगाना सरकार विधायी कार्य मंत्री डी श्रीधर बाबू ने मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी की ओर से विधेयक पेश करने का प्रस्ताव रखा. विधेयक के तहत जो कोई भी घृणा फैलाने का अपराध करता है, उसे कम से कम एक वर्ष की कारावास की सजा दी जाएगी जिसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है. इसके अलावा 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा. बार-बार अपराध करने पर एक लाख रुपये का जुर्माना और दो वर्ष से लेकर दस वर्ष तक के कारावास की सजा हो सकती है. बताया गया है कि इस विधेयक के तहत यह अपराध गैर-जमानती है. विधेयक में कहा गया है, मौजूदा कानूनी ढांचा घृणास्पद भाषणों और घृणा अपराधों के बदलते स्वरूप और अभिव्यक्तियों को व्यापक रूप से संबोधित नहीं करता है, जिसके लिए ऐसे आचरण को प्रभावी ढंग से रोकने, विनियमित करने और दंडित करने के लिए समर्पित और मजबूत कानून की आवश्यकता है, साथ ही प्रभावित व्यक्तियों के लिए संरक्षण और न्याय सुनिश्चित करना भी आवश्यक है. तेलंगाना मंत्रिमंडल ने 23 मार्च को इस विधेयक को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य दंगों और संघर्षों को भड़काने वाले भाषणों पर अंकुश लगाना है. इससे पहले मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी सरकार ने तेलंगाना प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर (पंजीकरण, सामाजिक सुरक्षा और कल्याण) अधिनियम, 2026 भी पेश किया है, जिससे राज्य के श्रमिकों को लाभ होगा. इस विधेयक से राज्य के लगभग 42 लाख गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म आधारित श्रमिकों को लाभ होगा. इस विधेयक के तहत श्रमिकों का पंजीकरण लागू किया जाएगा, साथ ही एक कल्याण बोर्ड और एक कल्याण कोष की स्थापना भी की जाएगी. इससे पहले कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने विधानसभा ने दिसंबर 2025 में “कर्नाटक घृणास्पद भाषण और घृणा अपराध (रोकथाम) विधेयक” पारित किया है, जो हेट स्पीच के खिलाफ देश के सबसे सख्त कानूनों में से एक है. इसके तहत नफरत फैलाने या हिंसा भड़काने पर 1 से 7 साल तक की जेल, भारी जुर्माना और गैर-जमानती अपराध का प्रावधान है. यह बिल धर्म, जाति, या समुदाय के आधार पर भेदभाव फैलाने वाली किसी भी अभिव्यक्ति (लेखन, संकेत, इलेक्ट्रॉनिक संचार) को अपराध मानता है.

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