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एक नए बंगाल की तलाश में अभिषेक बनर्जी, तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनावी खेल बदल पाएगी ‘आबर जीतबे बांग्ला’

जब अभिषेक बनर्जी अपनी नई यात्रा ‘आबर जीतबे बांग्ला’ (बंगाल फिर जीतेगा) के साथ बंगाल के जीवंत राजनीतिक परिदृश्य में कदम रखते हैं, तो माहौल उम्मीदों से भरा हुआ दिखता है. यह राज्यव्यापी यात्रा सिर्फ एक और राजनीतिक पदयात्रा नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है. आगामी अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस की मजबूती और जनसमर्थन को परखने का प्रयास. 38 वर्षीय अभिषेक बनर्जी आधुनिक नेतृत्व की झलक पेश करते हैं, युवा ऊर्जा और परिपक्व महत्वाकांक्षा का ऐसा मेल, जो उस राज्य को फिर से संगठित करने की कोशिश करता है, जिसका इतिहास राजनीतिक उथल-पुथल और सांस्कृतिक समृद्धि से भरा रहा है. उनका उद्देश्य केवल ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल सरकार के लगातार तीन कार्यकालों की उपलब्धियां गिनाना नहीं है, बल्कि जनता से फिर से जुड़ना भी है, ऐसे अंदाज में जो गहराई से असर डाले और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कथित सत्तावादी प्रवृत्तियों के खिलाफ एक स्पष्ट रेखा खींचे. रोड शो, जनसभाओं और समुदायों से संवाद के जरिये वे बंगाल की पहचान को दोहराना चाहते हैं, एक ऐसी कहानी, जो राज्य की सामाजिक-राजनीतिक चेतना में रची-बसी है. ‘आबर जीतबे बांग्ला’ को भाजपा की कथित कठोर नीतियों के जवाब के तौर पर पेश करती है, जिनके बारे में पार्टी का कहना है कि वे बंगाल की गरिमा और अधिकारों को कमजोर करती हैं. यह नारा जुझारूपन का प्रतीक है, ‘जतोई कोरो हमला, आबर जीतबे बांग्ला’ (केंद्र के कितने भी हमले हों, बंगाल फिर जीतेगा). अभिषेक की भूमिका बहुआयामी है, वे उम्मीद के शिल्पकार भी हैं और बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षक भी. वे केवल कल्याणकारी योजनाओं की सूची नहीं देंगे, बल्कि उस एकजुटता की भावना को जगाएंगे, जिसने ऐतिहासिक रूप से बंगाल की राजनीति को आकार दिया है. तृणमूल कांग्रेस नियमित रूप से भाजपा-नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर बंगाल के साथ व्यवस्थित दमन की नीतियां अपनाने का आरोप लगाती है. इसके प्रमाण के तौर पर नेता कहते हैं, ‘केंद्र पर 1.96 लाख करोड़ रुपये का बकाया.’ इसके साथ ही अभिषेक बनर्जी चुनाव आयोग द्वारा किए गए विवादित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) का जिक्र करते हैं, जिसे वे ‘बंगालियों को वोट के अधिकार से वंचित करने की कवायद’ बताते हैं.

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