आज राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर मैं सभी देशवासियों को बधाई देती हूं। मतदाता पहचान पत्र प्राप्त करने वाले, यहां उपस्थित युवा मतदाताओं सहित, पूरे देश के युवा मतदाताओं को मैं विशेष बधाई देती हूं। यह पहचान पत्र आपको विश्व के सबसे बड़े और जीवंत लोकतन्त्र में सक्रिय भागीदारी का अमूल्य अधिकार प्रदान करता है। मुझे विश्वास है कि देश के सभी युवा मतदाता बहुत जिम्मेदारी के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे तथा राष्ट्र के निर्माण में अपनी भागीदारी निभाएंगे। आज मैं महिला मतदाताओं को भी विशेष बधाई देती हूं। विभिन्न चुनावों में भारी संख्या में मतदान करके हमारी माताएं-बहनें-बेटियां हमारे गणतन्त्र को और अधिक शक्तिशाली बना रही हैं। निर्वाचन प्रक्रिया में सराहनीय योगदान देने के लिए आज पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी व्यक्तियों और संस्थानों को मैं बधाई देती हूं। लोकतन्त्र और मताधिकार के प्रसंग में बाबासाहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के एक शिक्षाप्रद विचार का मैं उल्लेख किया करती हूं। बाबासाहब मानते थे कि मताधिकार का प्रयोग राजनैतिक शिक्षा को सुनिश्चित करने का माध्यम है। मैं आशा करती हूं कि अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए हमारे मतदाता, अपनी राजनैतिक जागरूकता का परिचय देते रहेंगे और निर्वाचन पद्धति के माध्यम से हमारे लोकतन्त्र को और अधिक शक्ति प्रदान करते रहेंगे। देवियो और सज्जनो, भारतभूमि लोकतन्त्र की जननी है। हमारे आधुनिक लोकतन्त्र के संदर्भ में दो तिथियां बहुत महत्वपूर्ण हैं। 26 नवंबर 1949 को हमने अपने संविधान को अपनाया। उसके दो महीने बाद 26 जनवरी, 1950 को हमने अपने संविधान को पूरी तरह से लागू किया और हमारा गणराज्य अस्तित्व में आया। संविधान के केवल 16 अनुच्छेद ऐसे थे जो 26 नवंबर, 1949 के दिन ही तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए थे। उनमें से एक अनुच्छेद 324 भी था जिसके तहत निर्वाचन आयोग की स्थापना और कार्यों से जुड़े प्रावधान निर्धारित किए गए हैं। इसी अनुच्छेद के अनुसार 26 जनवरी, 1950 के दिन, यानी हमारे गणतन्त्र की स्थापना के एक दिन पहले ही, 25 जनवरी, 1950 को निर्वाचन आयोग की स्थापना की गई। आज के दिन हम निर्वाचन आयोग की स्थापना के इस ऐतिहासिक अवसर पर अपने लोकतन्त्र का विशेष उत्सव मनाते हैं। मुझे बताया गया है कि आज के उत्सव में राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन के साथ-साथ राज्यों और संघ-राज्य-क्षेत्रों के स्तर पर, जिला और booth level पर अनेक देशवासी और संस्थान भागीदारी कर रहे हैं। मैं निर्वाचन आयोग सहित, ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ के इस उत्सव से जुड़े सभी आयोजकों और प्रतिभागियों की सराहना करती हूं। मुझे बताया गया है कि हमारे देश में मतदाताओं की संख्या 95 करोड़ से अधिक है। हमारे लोकतन्त्र की शक्ति केवल संख्या की विशालता में नहीं है बल्कि लोकतान्त्रिक भावना की गहराई में भी है। अत्यंत वयोवृद्ध मतदाता, दिव्यांग मतदाता और दूर-सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले मतदाता भी अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। मताधिकार के प्रयोग के ऐसे अनेक उत्साहवर्धकउदाहरण प्रस्तुत करने के लिए मैं प्रबुद्ध मतदाताओं की तथा निर्वाचन आयोग के नेतृत्व में सक्रिय election machinery के सभी लोगों की सराहना करती हूं।
