प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि, कांग्रेस ने वंदे मातरम के टुकड़े किए. ये उसका तुष्टीकरण की राजनीति को साधने का ये तरीका था. तुष्टीकरण की राजनीति के दबाव में कांग्रेस वंदे मातरम के बंटवारे के लिए झुकी. इसलिए कांग्रेस को एक दिन भारत के बंटवारे के लिए भी झुकना पड़ा, कांग्रेस ने आउससोर्स कर लिया है, दुर्भाग्य से कांग्रेस की नीतियां वैसी की वैसी ही है. आईएनसी चलते-चलते एमएनसी हो गया. जिन-जिन के साथ कांग्रेस जुड़ा है, वे वंदे मातरम पर विवाद कड़ा करते हैं. जब कसौटी का काल आता है, तभी यह सिद्ध होता है कि हम कितने दृढ़ हैं, कितने सशक्त हैं. 1947 में देश आजाद होने के बाद देश की चुनौतियां बदली, प्राथमिकताएं बदली, लेकिन बारात पर जब-जब संकट आए, देश हर बार वंदे भारत की भावना के साथ आगे बढ़ा. पीएम मोदी के बाद वंदे मातरम पर चर्चा पर लोकसभा में विपक्ष के उपनेता गौरव गोगोई ने जवाब दिया. गौरव गोगोई ने कहा कि, मैं बंगाल की उस भूमि को नमन करता हूं, जहां से बंकिम चंद्र, रवींद्र नाथ टैगोर, खुदीरामबोस सहित कई महापुरुष आए. बंगाल की धरती ने न हमें सिर्फ राष्ट्रगान दिया, बल्कि राष्ट्रीय गीत भी दिया. उन्होंने कहा कि जिन्होंने ऐसी कविताएं रची, ऐसी गीत रचे, जिन शब्दों की प्रेरणाओं के साथ स्वतंत्रता सेनानियों को आजादी की लड़ाई लड़ने की प्रेरणा मिली. उन्होंने कहा कि, पीएम मोदी ने वंदे मातरत के इतिहास की और उसके जन्म की बात की. मंगल पांडे के विद्रोह के बाद अंग्रेजों का जुल्म और बढ़ गया था. उस क्रम की धारा में बंकिम चंद्र भी एक थे. उन्होंने आनंदमठ लिखा. आनंदमठ उस संदर्भ में लिखा गया, जिस समय ईस्ट इंडिया कंपनी उस तरह के टैक्स हमारे किसानों पर लगा रही थी कि जीना मुश्किल हो गया था, लेकिन वंदे मातरम एक गीत था, जो1905 में बना. संसद का शीतकालीन सत्र जारी है. सत्र के छठवें दिन यानी आज राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सदन में विशेष चर्चा की शुरुआत हुई. बता दें कि वंदे मारतम पर लोकसभा में 10 घंटे चर्चा होगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वंदे मातरम पर चर्चा की शुरुआत की. बता दें कि विपक्ष ने भी वंदे मातरम पर चर्चा के लिए सहमति जताई है. जिससे सदन में विरोध या हंगामे का प्रत्यक्ष कारण नहीं है, बावजूद इसके चर्चा में दोनों पक्षों की ओर से ऐसे बयान या शब्द कहे जा सकते हैं जिससे शीतकालीन सत्र का छठवां दिन भी हंगामेदार रह सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विशेष तौर पर राष्ट्रगीत को खंडित किए जाने के ऐतिहासिक तथ्यों पर सदन में बात कर रहे हैं.
