राज्य के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल क्षेत्र में एमआईएम को फिर हाथ लगा केन्द्र सरकार की सीएए एनआरसी का भावी चुनावी मुद्दा
सीमांचल (अशोक/विशाल)
पिछले बार के लोक सभा चुनाव में सीमांचल की चारों संसदीय क्षेत्रों में से तीन संसदीय क्षेत्रों पर महागठबंधन का कब्ज़ा हुआ था और एक संसदीय क्षेत्र पर भाजपा काबिज हुई थी।
लिहाजा , इस बार भी उसी खुशफहमी में महागठबंधन वाली दलें राजद कांग्रेस और जदयू इतरा रही है कि आने वाले अगले लोकसभा चुनाव में भी वही परिणाम हांसिल होंगे।
लेकिन , जानकारों की मानें तो वैसी कोई गुंजाइश इस बार आसान नजर नहीं आ रही है।
सीमांचल में महागठबंधन से बदला लेने को ठानी एमआईएम ने अगले लोकसभा चुनाव में महागठबंधन की राह को बाधित करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी शुरू कर दी है।
जातिगत आधार की मुस्लिम राजनीति को सीमांचल के चारो संसदीय क्षेत्रों में जोर शोर से उछालने में लगी एआईएमआईएम ने इस बार फिर से हाथ लगे केन्द्र सरकार की एनआरसी,सीएए और यूसीसी के मुद्दे को उछालना शुरू कर मुस्लिम समुदाय की गोलबंदी कराना शुरू कर दिया है।
इसके अलावा अपनी पार्टी की बिहार प्रदेश कमिटी में कोषाध्यक्ष के पद पर किशनगंज जिला के पूर्व जिलाध्यक्ष इसहाक आलम को आसीन कराते हुए किशनगंज के एमआईएम जिलाध्यक्ष पद पर राजद से घसीट लाये एक चर्चित नेता रहीमुद्दीन उर्फ हैबर बाबा को नियुक्त कर दिया है जिनके सम्मान में उक्त नियुक्ति वाले दिन भारी संख्या में एआईएमआईएम के कार्यकर्ता और नेतागण जुटे थे और यह सारी प्रक्रिया स्वयं बिहार प्रदेश एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्णिया जिले के अमौर विधान सभा क्षेत्र के एमआईएम विधायक अख्तरूल ईमान ने अपनी मौजूदगी में संपन्न करायी थी।
इस सांगठनिक बदलाव को सीमांचल का राजनीतिक महकमां बहुत महत्वपूर्ण मान रहा है और कयास लगाया जाने लगा है कि कहीं इस बार बिहार प्रदेश कांग्रेस की इकलौती संसदीय सीट किशनगंज की जड़ को ही न एमआईएम कुरेद दे।
पिछले बार की लोक सभा चुनाव के बाद हुए पिछले विधान सभा चुनाव के दौरान जब सीएए का राजनीतिक हौवा केन्द्र सरकार द्वारा खड़ा कर दिया गया था तो उसी मुद्दे को मुस्लिम समुदाय में उछालकर एमआईएम ने सीमांचल की पांच विधान सभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों को जीत हांसिल करा दिया था। पूर्णिया जिले की दो विधान सभा सीटें बायसी और अमौर सहित बड़ी आसानी से किशनगंज जिले की भी दो विधान सभा क्षेत्र की सीटें बहादुरगंज और कोचाधामन को जीत लिया था। पांचवी सीट एमआईएम ने अररिया जिले की जोकीहाट विधान सभा क्षेत्र की जीत ली थी।
लेकिन , उसके बाद के राजनीतिक घटनाक्रम में अचानक राजद ने एमआईएम की पांचों सीटों में से एकमात्र अमौर की सीट को छोड़कर शेष चारों सीटों के विजेताओं को राजद के पाले में घसीट लाया था।जिसके बूते बिहार की सत्ता से भाजपा की विदाई करके नीतीश और तेजस्वी ने बिहार में भाजपा मुक्त महागठबंधन की सरकार गठित कर ली।
और दूसरी ओर , एमआईएम के प्लेटफार्म पर महज एक ही सीट पूर्णिया जिले की अमौर विधान सभा क्षेत्र मात्र ही बची रह गई। जिसका भारी मलाल एमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान (विधायक) को हुआ था और उन्होंने उसका बदला भविष्य में लेने को ठानी थी।
लिहाजा , इस लोक सभा चुनाव की घड़ी में ही एमआईएम को फिर से केन्द्र सरकार की एनआरसी सीएए और यूसीसी का ऐसा मुद्दा हाथ लग गया जिसको लेकर एमआईएम एक बार फिर से मुस्लिम समुदाय की गोलबंदी में जूट गई।
इसके अलावा एमआईएम द्वारा सीमांचल के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल संसदीय क्षेत्र किशनगंज की जनता को यह भी बताया जा रहा है कि किस प्रकार उनके एमआईएम विधायकों को ही तोड़कर महागठबंधन वाली राजद ने बिहार में अपनी सरकार नीतीश कुमार के नेतृत्व में गठित कर ली, लेकिन , किशनगंज को मंत्रिपरिषद में कोई स्थान नहीं दिया। इस बात को घूम घूम कर तूल देने में एमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान जमकर लगे हुए हैं। इसके अलावा जनता के दिमाग को फिराने वाला सीएए का मुद्दा अलग से उनके हाथ में है ही।
बताया जाता है कि राज्य के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल क्षेत्र किशनगंज संसदीय क्षेत्र की जनता में यूं भी अपने क्षेत्र के कांग्रेस सांसद डॉ जावेद आजाद के खिलाफ व्यापक असंतोष पूर्व से ही व्याप्त है , जिसे एमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान लगातार हवा देने में लगे हुए हैं।दूसरी ओर, इसी क्रम में एमआईएम के नवनियुक्त किशनगंज जिला अध्यक्ष हैबर बाबा उर्फ रहीमुद्दीन ने भी संपूर्ण किशनगंज संसदीय क्षेत्र का तूफानी दौरा बारंबार शुरू कर रखा है जो घूम घूम कर केन्द्र सरकार वाली उसी एनआरसी और सीएए की व्याख्यान जनता के बीच करते फिर रहे हैं , जिस व्याख्यान को जनता में परोसकर पिछली बार की विधान सभा क्षेत्र के चुनाव में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने सीमांचल में पांच विधान सभा क्षेत्र की सीटों पर जीत हांसिल करने का इतिहास रचा था।एमआईएम के चार विधायकों को छीनने के एवज में राजद से राजनीतिक बदला साधने की रणनीति जो अख्तरूल ईमान ने बनाई है उसे किशनगंज की संसदीय सीट को जीत कर साकार बनाने की कोशिश में हैबर बाबा उर्फ रहीमुद्दीन जी जान से लगे हुए हैं ।लिहाजा , यही कारण है कि इस बार के आने वाले अगले लोकसभा चुनाव में सीमांचल में महागठबंधन की हालत सही नजर नहीं आ रही है।
