पटना, टी.पी.एस. कॉलेज, पटना में जल्द ही एक मानसिक स्वास्थ्य सहायता केंद्र की स्थापना की जाएगी। इसकी घोषणा महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. तपन कुमार शांडिल्य ने आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर मनोविज्ञान विभाग द्वारा आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम “योर वॉयस मैटर्स: स्पीकिंग अप टू स्टॉप सुसाइड” की अध्यक्षता करते हुए की। उन्होंने कहा, “यदि इस प्रयास से एक भी जान बचाई जा सके, तो यह सृष्टि को बचाने के समान है। मानव शरीर ही सबसे बड़ा चमत्कार है, जिसमें सारा सुख समाहित है, इसे पहचानना आवश्यक है ।” प्रो. शांडिल्य ने समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति साक्षरता की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि देश में हर साल लाखों लोग आत्महत्या कर रहे हैं, जिनमें उत्पादक वर्ग के लोग प्रमुख हैं, जो देश के मानव संसाधन की रीढ़ हैं। उन्होंने जैविक, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और आर्थिक कारणों का मूल्यांकन कर सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया। कोविड महामारी ने इस समस्या को और गंभीर कर दिया है। उन्होंने मीडिया से सकारात्मक भूमिका निभाने और शिक्षकों व कर्मचारियों से छात्रों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने का आह्वान किया। साथ ही, योग को मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी बताते हुए भावनाओं को व्यक्त करने के लिए सुरक्षित माहौल बनाने की प्रतिज्ञा लेने की बात कही । कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. रंजन कुमार, प्रभारी, केंद्रीय पुस्तकालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, ने कहा कि आत्महत्या की घटनाएं व्यक्ति, परिवार, समाज और संस्थाओं को गहराई से प्रभावित करती हैं। उन्होंने बताया कि विश्व में हर 40 सेकंड में एक आत्महत्या की घटना होती है, और इसके प्रयास इसके तीन गुना हैं। जैविक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक-आर्थिक दबाव इसके प्रमुख कारण हैं। 65 वर्ष से अधिक आयु के लोग, चिकित्सा पेशेवर, एलजीबीटी समुदाय, डॉक्टर, पुलिस, सैन्यकर्मी और छात्र इस जोखिम में सबसे अधिक हैं। उन्होंने आत्महत्या के जोखिम की पहचान जैसे निराशा, असहायता और आत्ममूल्यहीनता पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्राचार्य से कॉलेज में काउंसलिंग सेल की स्थापना का अनुरोध किया ।उद्घाटन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मनोविज्ञान विभाग की प्रमुख प्रो. रूपम ने स्वागत भाषण में कहा कि प्राचार्य के नेतृत्व में सेमिनार, व्याख्यान और अतिथि व्याख्यानों के आयोजन से शैक्षणिक माहौल में सुधार हुआ है, जिसने छात्रों के व्यक्तिगत विकास को बढ़ावा दिया है। उन्होंने बताया कि यह जागरूकता कार्यक्रम हर साल 10 सितंबर को मनाया जाता है, और युवाओं में बढ़ते शैक्षणिक दबाव, रिश्तों की समस्याओं, आर्थिक तनाव और सामाजिक समस्याओं के कारण मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। चिंता इसके प्रमुख लक्षणों में से एक है।कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी योगेश कुमार ने किया । कार्यक्रम में प्रो. विजय कुमार सिन्हा, प्रो. अंजलि प्रसाद, डॉ. उषा किरण, डॉ. शशि भूषण चौधरी, डॉ. ज्योत्सना कुमारी, डॉ. मुकुंद कुमार, डॉ. सुशोभन पलाधि, डॉ. शशि प्रभा दुबे, डॉ. सुनीता कुमारी, डॉ. दीपिका, डॉ. प्रीति कुमारी, डॉ. शशि शेखर सिंह, डॉ. नूतन कुमारी, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. अश्विनी कुमार, डॉ. देवरति घोष, डॉ. चंद्रशेखर ठाकुर, डॉ. ओंकार पासवान, डॉ. हंस कुमार सिंह, पूजा कुमारी, श्री मनोज कुमार सिंह, श्री कुमार अमिताभ, श्री मृत्युंजय कुमार, श्री अमित कुमार, श्री शिवम पराशर आदि की भागीदारी रही । डॉ. तरन्नुम नसीम ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि सरकार ने इसके लिए टोल-फ्री नंबर उपलब्ध कराया है, जिसके बारे में लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है ।
