अलीगढ़ 21 सितम्बर रजनी रावत। भगवान वाल्मीकि के चरणों में कोटि-कोटि नमन करते हुए विधायक अनिल पाराशर ने कहा कि यदि भगवान वाल्मीकि न होते तो सनातन धर्म और भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में कोई नहीं जान पाता। उन्होंने वाल्मीकि शोभायात्रा कमेटी की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस बार का मेला अद्भुत और दिव्य होगा।
विधायक ने जिला अस्पताल में रोगियों को फल वितरण कार्यक्रम में शामिल होकर स्वयं को धन्य बताया और कमेटी के सभी पदाधिकारियों का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि जो स्वयं को हिंदू मानते हैं और कट्टर हिंदूवादी कहते हैं, उन्हें इस शोभायात्रा को ऐतिहासिक बनाने के लिए बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए।
श्योराज जीवन का संदेश
कमेटी के संस्थापक श्योराज जीवन ने कहा कि वाल्मीकि की संस्कृत रामायण में राजा-प्रजा, पुत्र-पिता, पत्नी-पति के सभी कर्तव्यों का उल्लेख है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस बार का मेला अद्वितीय होगा।
कमेटी का भव्य स्वागत
मेला अध्यक्ष चमन पहलवान और कार्यवाहक अध्यक्ष बोहरे सोनू सर्रो खरे ने विधायक अनिल पाराशर, संस्थापक श्योराज जीवन, मुख्य सलाहकार राजीव भारती और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राज जीवन का पगड़ी पहनाकर, दुपट्टा उड़ाकर और फूल मालाओं से भव्य स्वागत किया।
नौजवानों के हाथों में कमान
प्रदेश अध्यक्ष राजेश राज जीवन ने बताया कि इस बार संस्थापक श्योराज जीवन ने मेले की कमान नौजवानों को सौंपी है। लोकप्रिय पहलवान चमन पहलवान को मेला अध्यक्ष, बोहरे सोनू सर्रो खरे को कार्यवाहक अध्यक्ष, विकास चेतन को वरिष्ठ महामंत्री, राज तिलक चौधरी को महामंत्री, शनि नंद किशोर को मेला इंचार्ज और राहुल टांक, गौरव नार्वे, राहुल वाल्मीकि आदि युवाओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं हैं। इससे युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
फल वितरण और लगातार कार्यक्रम
मुख्य सलाहकार राजीव भारती ने विधायक द्वारा फल वितरण करने पर धन्यवाद व्यक्त किया और कहा कि मेहनत और ईमानदारी से किए गए हर कार्य में सफलता मिलती है। मेला कमेटी लगातार एक माह तक विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर रही है।
भव्य मेला की तैयारी पूरी
इस अवसर पर चमन पहलवान, महेंद्र राठौर, शीशुपाल वाल्मीकि, राजेश पथिक, गौरव चंदेल, कुनाल विवेकी, विशाल जीवन, राजेश राजा पिंटू सेठ, कल्याण विवेकी, मास्टर दशरथ, राजेंद्र चौहान, राहुल वाल्मीकि, पीयूष कुमार, सनी वाल्मीकि सहित बड़ी संख्या में मेला पदाधिकारी मौजूद रहे और सभी ने इसे ऐतिहासिक व दिव्य मेला बनाने का संकल्प लिया।
