अरुण मिश्र, ब्यूरो प्रमुख, गोपालगंज,
लोक आस्था व सूर्योपासना का महापर्व मंगलवार की सुबह उदीयमान भगवान भास्कर के अर्घ के साथ संपन्न हो गया। इस महापर्व की शुरुआत 25 अक्टूबर से नहाय- खाय के साथ शुरू हुआ जो 28 अक्टूबर को प्रातः अर्घ के साथ समाप्त हुआ। छठव्रती सरोज देवी बताती है कि भगवान सूर्य आरोग्य के देवता हैं। यह पर्व संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए मनाया जाता है।इतना ही नहीं इस व्रत को रखने से परिवार में सुख शांति तथा मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है ।ऐसे तो महापर्व छठ कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस महापर्व को संपूर्ण बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश एवं देश की राजधानी दिल्ली सहित सभी महानगरों में मनाया जाता है।इस महापर्व का खास उत्साह बिहार में देखने को मिलता है। कार्तिक मास के शुरू होने के साथ ही जहां व्रती महिलाएं महापर्व की तैयारी में जुट जाती हैं। वहीं उनके घर परिवार के वैसे लोग जो प्रदेश में रहकर नौकरी करते हैं । वह भी महापर्व पर अपने घर आकर पूजा में शामिल होते हैं। उचकागांव प्रखंड के खरहरवां गांव की रहने वाली छठव्रती अनार पांडेय व बबीता पांडेय बताती है कि इस वर्ष छठ महापर्व अपने ही गांव की महिलाओं के साथ मानने का इरादा था, लेकिन स्वास्थ्य सही नहीं रहने के कारण गांव नहीं आई और दिल्ली में ही महापर्व छठ मनाई, घर नहीं आने और अपनों के साथ महापर्व में शामिल नहीं होने का काफी मलाल है। भगवान भास्कर ने सब कुछ ठीक रखा तो अब नहीं चूकेंगे। गांव आएंगे और अपनों के साथ महापर्व छठ मनाएंगे।
