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भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का AIIMS नागपुर के द्वितीय दीक्षांत समारोह में संबोधन

नागपुर की इस पवित्र भूमि पर आप सब के बीच उपस्थित होकर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। कल ही हम देशवासियों ने भारत के संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की जन्म जयंती मनाई है। आज उनकी दीक्षा भूमि नागपुर की इस धरती से मैं उनकी पुण्य स्मृति को नमन करती हूं। राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, AIIMS नागपुर में आयोजित इस दीक्षांत समारोह में उपाधि और पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को मैं बहुत-बहुत बधाई देती हूं। आज उपाधि और पदक प्राप्त करने वाली बेटियों को मैं विशेष बधाई देती हूं। यहाँ पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में बेटियों की संख्या अधिक है। देशभर में AIIMS, IITs, IIITs, IIM, engineering institutions, law institutes जहां भी मैं जाती हूँ, यह परिवर्तन दिखाई देता है। देशवासियों का सपना है देश की आजादी के 100 वर्ष पूरा होने तक विकसित भारत का। मेरा मानना है कि बेटा और बेटियाँ मिलकर इस सपना को पूरा करेंगे। मैं इस सफलता में योगदान देने वाले विद्यार्थियों के माता- पिता, अभिभावकगण और शिक्षकों की भी सराहना करती हूं। प्रिय विद्यार्थीगण, आपने जिस परिश्रम, प्रतिबद्धता और लगन के साथ अपनी शिक्षा पूर्ण की है, वह सराहनीय है। आप सब एक नई यात्रा का शुभारंभ कर रहे हैं। आज उपाधि ग्रहण करने के साथ आप लोग एक महत्वपूर्ण दायित्व को स्वीकार कर रहे हैं जो मानव जीवन और समाज की भलाई से जुड़ा हुआ है। चिकित्सा का क्षेत्र केवल एक profession नहीं है। यह संवेदनशीलता के साथ मानवता की सेवा करने का मार्ग है। एक चिकित्सक न केवल बीमारियों का उपचार करता है, बल्कि बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों के मन में आशा का संचार भी करता है। आपके द्वारा दिया गया सहानुभूतिपूर्ण परामर्श न केवल बीमार व्यक्ति बल्कि उसके परिवारजनों को भी संबल प्रदान करता है। कई बार चिकित्सकों के सामने कठिन परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं। लेकिन उन परिस्थितियों में भी बीमार व्यक्ति और उनके परिवारजनों के प्रति संवेदनशीलता का भाव बनाए रखना चाहिए। मरीजों और उनके परिवारजनों को भी चिकित्साकर्मियों के प्रति सदैव सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। चिकित्सक और मरीज के बीच के विश्वास को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है। प्रिय विद्यार्थीगण, यह हर्ष का विषय है कि अपनी स्थापना के कुछ ही वर्षों में, AIIMS नागपुर ने चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवा के एक प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है। ऐसे प्रतिष्ठित संस्थान से शिक्षा प्राप्त करना अपने आप में गौरव की बात है। मुझे विश्वास है कि इस संस्थान में आपने न केवल ज्ञान और कौशल अर्जित किया होगा, बल्कि मानवीय मूल्यों, नैतिकता और सेवा-भाव को भी आत्मसात किया होगा। आपके संस्थान का motto है ‘स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्’ अर्थात अच्छे स्वास्थ्य से हर कार्य पूरा किया जा सकता है। कहा जाता है स्वास्थ्य ही सम्पदा है। अगर स्वास्थ्य ठीक हो तो काम करने के लिए, आगे बढ़ने के लिए हिम्मत बढ़ेगी। इस मूल मंत्र को आप पूरी तरह से आत्मसात करें और मरीजों के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य पर भी पूरा ध्यान दें। आप AIIMS नागपुर से उपाधि प्राप्त करने वाले आरंभिक बैच के विद्यार्थी हैं। आने वाले समय में, आप देश-विदेश में अनेक क्षेत्रों में कार्य करेंगे। आप जहां भी कार्य करें, अपने ज्ञान, कार्य और व्यवहार से ऐसा मानदंड स्थापित करें कि AIIMS नागपुर के भावी विद्यार्थी आप पर गर्व करें और संस्थान का नाम ऊंचा हो।

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