राजद प्रमुख लालू प्रसाद की मुश्किलें थोड़ी उस वक्त कम हुई जब नई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आईआरसीटीसी केस में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अपना फैसला टाल दिया. बुधवार को कोर्ट इस मामले में अपना फैसला सुनाने वाली थी. लेकिन, अंतिम संमय में कोर्ट ने इसे टालते हुए 22 मई को फैसला देने की बात कही है. इस मामले में ईडी ने पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद, पूर्व सीएम राबड़ी देवी और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. कोर्ट पहले ही आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी कर चुकी है और फैसला सुरक्षित रखा गया था. लालू परिवार ने निचली अदालत के अक्टूबर 2025 के उस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप तय किए गए थे. दूसरी ओर ईडी ने इस याचिका का जोरदार विरोध करते हुए दावा किया है कि उनके पास इस मामले से जुड़े ‘पुख्ता सबूत’ मौजूद हैं. सीबीआई और ईडी के अनुसार, यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद 2004 से 2009 के दौरान केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे. आरोप है कि उनके कार्यकाल में आईआरसीटीसी के तहत रांची और पुरी स्थित दो होटलों के टेंडर में भारी अनियमितताएं हुईं. इन होटलों और उनसे जुड़ी जमीनों को नियमों की अनदेखी करते हुए निजी कंपनियों को पट्टे पर दिया गया, जिससे कुछ कंपनियों को अनुचित फायदा पहुंचा. ईडी का मानना है कि इस पूरी प्रक्रिया में मनी लॉन्ड्रिंग का एंगल भी शामिल है, जिसकी कड़ियां अब धीरे-धीरे खुल रही हैं. जबकि बचाव पक्ष इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है. अब इंतजार 22 मई का है, जब कोर्ट अपना फैसला सुनायेगा.
