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अर्थशिला पटना में आगरा घराने की सुरमयी परंपरा से सजी हिंदुस्तानी वोकल संध्या

अर्थशिला पटना एवं आईटीसी संगीत रिसर्च अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत पर आधारित एक विशेष संगीतमय संध्या का आयोजन किया गया। आगरा घराने की समृद्ध गायकी परंपरा को समर्पित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगीत रसिकोंविद्यार्थियों और कला प्रेमियों ने सहभागिता की तथा भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराईसौंदर्य और संवेदनशीलता का आनंद लिया कार्यक्रम के मुख्य कलाकार आईटीसी संगीत रिसर्च अकादमी के युवा एवं प्रतिभाशाली गायक शादाज अय्यर थे। कम आयु में ही उस्ताद शौकत हुसैन ख़ान से आगरा घराने की तालीम प्राप्त करने वाले शादाज अय्यर ने अपनी प्रतिभा के बल पर अनेक प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं एवं सम्मानों में उल्लेखनीय सफलता अर्जित की हैजिनमें ‘क्लासिकल वॉइस ऑफ इंडिया’ जैसी प्रतिष्ठित उपाधि भी शामिल है। वर्तमान में वे आईटीसी संगीत रिसर्च अकादमी के स्कॉलर के रूप में आगरा घराने की प्रख्यात गायिका विदुषी सुभ्रा गुहा के मार्गदर्शन में अपनी साधना को और अधिक परिष्कृत कर रहे हैं। अपनी प्रस्तुति में शादाज अय्यर ने आगरा घराने की विशिष्ट गायकी शैली को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। राग के विस्तार में उनकी गहरी समझसुरों पर सशक्त पकड़दमदार आवाज़आलाप की गंभीरतातानों की स्पष्टता तथा लयकारी की परिपक्वता ने श्रोताओं को विशेष रूप से प्रभावित किया। उन्होंने राग के स्वरूप को अत्यंत संवेदनशीलता और सौंदर्यबोध के साथ विकसित करते हुए परंपरागत आगरा अंग की गरिमा को जीवंत बनाए रखा। उनकी प्रस्तुति में युवा ऊर्जा और शास्त्रीय अनुशासन का ऐसा सुंदर समन्वय देखने को मिला जिसने पूरी महफ़िल को मंत्रमुग्ध कर दिया तथा उपस्थित श्रोताओं से भरपूर सराहना और तालियाँ बटोरीं। मुख्य प्रस्तुति के दौरान मंच पर सुर और लय का एक अद्भुत संवाद देखने को मिला। शादाज अय्यर के साथ तबले पर विख्यात कलाकार बिवाश संघाई ने संगत की। उनके तबले की सधी हुई थापनफ़ासत भरे बोल और संवेदनशील संगत ने गायन की लयात्मकता को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। वहीं सारंगी पर अमान हुसैन ने अपनी मधुर एवं भावपूर्ण संगत से प्रस्तुति में विशेष रंग भर दिए। सारंगी की सुरीली गूँजतबले की प्रभावशाली थाप और मुख्य गायक की सशक्त तानों ने मिलकर संगीत का ऐसा उत्कृष्ट वातावरण निर्मित किया जिसने सभागार में उपस्थित प्रत्येक श्रोता को गहराई से प्रभावित किया। कार्यक्रम के दौरान कलाकारों और श्रोताओं के बीच एक आत्मीय सांगीतिक संवाद स्थापित हुआ। रागदारी संगीत की गंभीरता और सौंदर्य से भरी इस संध्या ने न केवल पारंपरिक हिंदुस्तानी संगीत की समृद्ध विरासत से परिचित करायाबल्कि युवा पीढ़ी को भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति प्रेरित करने का भी कार्य किया। अर्थशिला पटना भारतीय शास्त्रीय संगीतकला और संस्कृति की समृद्ध परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने तथा सांस्कृतिक संवाद को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर करता रहेगा।

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