पटना। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ और संविधान-लोकतंत्र को बचाने के लिए ‘‘बदलाव जरूरी है’’ नारे के साथ 01 सितंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली आयोजित किया है। रैली की तैयारी को लेकर 17 अगस्त को पार्टी की बिहार राज्य परिषद की बैठक पटना में हुई। बैठक में रैली को लेकर रणनीति बनाई गयी। बैठक में लिए गए फैसले की जानकारी भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डा. गिरीशचंद्र शर्मा, राष्ट्रीय सचिव संजय कुमार, राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने संयुक्त रूप से संवाददाता सम्मेलन में दी। प्रेस सम्मेलन में इनके अलावे पार्टी राज्य सचिव मंडल के सदस्य का॰ सुरेन्द्र सौरभ एवं का॰ प्रमोद प्रभाकर मौजूद थे। भाकपा नेताओं ने कहा कि जन विरोधी मोदी सरकार के खिलाफ भाकपा की रैली ऐतिहासिक होगी। रैली की तैयारी देश के सभी राज्यों में जोर शोर से चल रही है। 06 से 15 अगस्त, 2026 राष्ट्रव्यापी पदयात्रा कार्यक्रम बिहार के सभी 38 जिलों में संपन्न हुआ। बिहार में सघन और सफल पदयात्रा में ‘‘बदलाव जरूरी है’’ नारा तथा 01 सितंबर, 2026 दिल्ली चलो का गूँज पूरे बिहार में गूँज रही है। इसे देखते हुए बिहार में पदयात्रा 25 अगस्त, 2026 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया। भाजपा के लोगों ने श्रीराम को भी नहीं छोड़ा, राम मंदिर से सैकड़ों करोड़ रुपये की चढ़ावा चोरी हो गई। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भाषण के दौरान लगा प्रधानमंत्री देश के छात्र-युवाओं से डर गए हैं। नक्सल का मतलब पढ़ा लिखा होता है। प्रधानमंत्री देश के पढ़े लिखे को दिमागी नक्सल कह रहे हैं और आवाज उठाने वाले असहमति रखने वाले और सरकार की नीतियों का विरोध करने वालों के खिलाफ अपने समर्थकों को उकसा रहे है। देश आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्षों का कार्यकाल लगातार बढ़ती चिंता, निराशा और कठिनाइयों में बदल चुका है। एक के बाद एक चुनाव में भाजपा ने विकास, रोजगार, समृद्धि, सुशासन और बेहतर भविष्य के बड़े-बड़े वादे किये लेकिन इसके बदले देश को बढ़ती बेरोजगारी, बेकाबू महंगाई, गहरी होती असमानता, कमजोर होती अर्थव्यवस्था, सिकुड़ता लोकतांत्रिक दायरा और बढ़ता सामाजिक तनाव मिला है। इसके बावजूद जब भी मोदी सरकार से जवाब मांगा जाता है, तो राष्ट्रीय विमर्श को किसी और दिशा में मोड़ दिया जाता है। आम जनता की रोजमर्रा की चिंताओं को सुलझाने के बजाय भाजपा और आरएसएस बार-बार सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, भावनात्मक मुद्दों और गढ़े हुए विवादों का सहारा लेते हैं। जवाबदेही से बचने के लिए धर्म की आड़ ली जाती है। अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए नफरत को बढ़ावा दिया जाता है। यह फूट इसलिए डाली जाती है ताकि जनता का ध्यान उनके असली मुद्दों से भटकाया जा सके। केन्द्र की भाजपा नेतृत्व वाली मोदी सरकार की कारपोरेट परस्त नीतियों तथा महंगाई से आम जनता त्रस्त है। बेरोजगारी तथा गलत शिक्षा नीति से छात्र और युवा परेशान है। आर.एस.एस. और भाजपा सरकार की साम्प्रदायिक विभाजनकारी नीतियों से हमारा समाज लहूलुहान हो रहा है। विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं तथा एजेन्सियों को ध्वस्त कर उसे क्षुद्र राजनीतिक स्वार्थ पूर्ति का औजार बना दिया गया है, जिसके चलते लोकतंत्र तथा न्यायतंत्र खोखला हो रहा है। कृषि के कारपोरेटीकरण से खेती-किसानी संकट में है। श्रमिकों के हक और अधिकार को छिना जा रहा है। महिला आरक्षण को ठंढ़े बस्ते में डालकर महिला अधिकार को पीछे ढकेला जा रहा है। चुनाव प्रक्रियाओं में हेराफेरी कर वयस्क मताधिकार पर कुठाराघात किया जा रहा है। जनता अब बदलाव चाह रही है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की दिल्ली में आयोजित 01 सितंबर, 2026 की बदलाव रैली में बिहार की ऐतिहासिक भागीदारी होगी।
