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02 अक्टूबर, 2026 को राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की जयंती साम्प्रदायिकता विरोधी दिवस के रूप में मनाया जायेगा।

भाकपा के राष्ट्रीय सचिव संजय कुमार व राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करने, बिहार के बाढ़-सूखा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने, स्कीम वर्करों को स्थाई व 26 हजार रुपये न्यूनतम वेतन करने, महिला आरक्षण लागू करने, भगत सिंह रोजगार गारंटी कानून लागू करने, डबल इंजन सरकार की जन विरोधी नीतियों, भूमि अधिग्रहण के नाम लाखों एकड़ भूमि पूंजीपतियों को देने, महिलाओं-छोटी छोटी बच्चियों पर हो रहे जुल्म, एनकाउंटर और बुलडोजर राज के खिलाफ मार्च निकाला गया। हमारी मांग है ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाया जाए। ैप्त् प्रक्रिया को रोका जाए। मतदाता सूचियों से गलत तरीके से बाहर किए गए सभी लोगों के मतदान का अधिकार बहाल किए जाएं। निर्वाचन आयोग की स्वतंत्र और लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली बहाल की जाए। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था को बदलकर ऐसी व्यवस्था लागू की जाए, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रस्तावित चयन समिति पर आधारित हो। इस समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल हो। बिहार में डबल इंजन की सरकार में मॉब लिन्चिंग, एनकाउंटर और बुलडोजर से ध्वस्तीकरण की कई घटनाएँ इस बात का संकेत है कि भाजपा की नई नवेली सरकार असहमति की आवाज को कुचलने, अल्पसंख्यकों के अन्दर भय व दहशत पैदा करने तथा भूमिहीन गरीब किसानों की कीमत पर कारपोरेट घरानों के लिए अवसर मुहैया कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सेटेलाईट टाऊनशीप योजना इसी का एक नमूना है। इस योजना के तहत बिहार के 11 जिलों के लगभग दो लाख एकड़ जमीन पर तलवार लटक रही है। डीजल-पेट्रोल, रसोई गैस की मूल्य वृद्धि से महंगाई और बढ़ गई है। घपला-घोटाला और भ्रष्टाचार के नित्य नये मामले उजागर हो रहे हैं। बेरोजगारी और पलायन से युवा परेशान हैं। कृषि और किसानों का संकट बढ़ रहा है। मनरेगा के समाप्त हो जाने से दलितों-गरीबों के समक्ष रोजगार और न्यूनतम मजदूरी का नया संकट उत्पन्न हो गया है। आंगनबाड़ी, आशाकर्मी, रसोईया, निर्माण कामगार, वित्त रहित कर्मी सहित समस्त स्कीम वर्कर, ठेका अनुबंध के बदले अपनी सेवा नियमित करने हेतु संघर्षरत है। चार श्रम संहिताओं के जरिए मजदूरों के हक और अधिकार को छिना जा रहा है। शिक्षा के बाजारीकरण, भगवाकरण तथा बार-बार प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लिक होने की घटनाओं से छात्र और शिक्षा का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। महिला उत्पीड़न की घटनाएँ बढ़ रही है तथा संसद-विधानसभाओं में 33 फीसद महिला आरक्षण को बार-बार लटकाया जा रहा। संवाददाता सम्मेलन में राज्य सचिवमंडल सदस्य जानकी पासवान, सुरेन्द्र सौरभ, इरफान अहमद फातमी, बिहार राज्य खेत मजदूर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व विधायक सूर्यकान्त पासवान आदि मौजूद थे।

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