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लापरवाही की दरार से टूटा चंपारण तटबंध! बगहा में गंडक का कहर, गांवों में दहशत

पश्चिम चंपारण के बगहा में गंडक नदी के तेज बहाव और बढ़ते दबाव के बीच चंपारण तटबंध में कई जगह टूटाव ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। खैरटवा के पास तटबंध टूटने के बाद नदी का पानी तेजी से आसपास के गांवों और खेतों की ओर फैलने लगा है। चखनी-खैरटवा के साथ बथवरिया के टेसरहिया इलाके में भी तटबंध के टूटने की सूचना है। पानी की रफ्तार बढ़ने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बताया जा रहा है कि तटबंध पर पहले से ही सीपेज और दरार के संकेत दिखाई दे रहे थे। स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों और अभियंताओं को दी गई थी, लेकिन समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग के अभियंताओं और ठेकेदारों पर भी कथित लापरवाही और अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि अगर तटबंध पर बढ़ते नदी के दबाव को देखते हुए तत्काल मरम्मत और सुरक्षा के इंतजाम किए जाते, तो टूटाव की स्थिति को टाला जा सकता था। वाल्मीकिनगर विधायक सुरेंद्र कुशवाहा ने भी तटबंध टूटने के पीछे लापरवाही की बात कही है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। तटबंध टूटने की सूचना मिलते ही प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। बगहा की एसडीएम चांदनी कुमारी रात से ही टूटे तटबंध के पास कैंप कर रही हैं। पश्चिम चंपारण के डीएम तरनजोत सिंह और बगहा एसपी राजेश कुमार भी देर रात तक घटनास्थल पर मौजूद रहे और हालात की निगरानी की। प्रशासन की ओर से तटबंध की मरम्मत के साथ राहत और बचाव कार्य शुरू करने की कवायद की जा रही है। नदी का पानी तेजी से कई गांवों और खेतों की ओर बढ़ रहा है, जिससे फसलों को नुकसान की आशंका है। प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन कराया जा रहा है। इसके आधार पर क्षतिपूर्ति और मुआवजे की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है।अब सबसे बड़ा सवाल तटबंधों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है। लगातार निगरानी के दावों के बावजूद अगर सीपेज और दरार के बाद भी तटबंध टूट गया,

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