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पूर्वी भारत में पहली बार इमेजलेस रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट की सुविधा

जीवनदान हेल्थ में पूर्वी भारत के पहले ड्रेगर मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर में जॉनसन एंड जॉनसन की वेलिस इमेजलेस रोबोटिक-असिस्टेड टेक्नोलॉजी से घुटना एवं कूल्हा प्रत्यारोपण सुविधा की शुरुआत

पटना, 2 अगस्त। इंटरनेशनल बोन एंड जॉइंट डे के उपलक्ष्य में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में पूर्वी भारत को एक बड़ी सौगात देते हुए राजधानी पटना स्थित जीवनदान हेल्थ ने पूर्वी भारत के पहले ड्रेगर मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में विश्व की अग्रणी स्वास्थ्य सेवा कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन की वेलिस

इमेजलेस रोबोटिक-असिस्टेड टेक्नोलॉजी के माध्यम से रोबोटिक-सहायता प्राप्त घुटना एवं कूल्हा प्रत्यारोपण शल्य चिकित्सा की सुविधा की शुरुआत की गई । इस संबंध में रविवार, प्रेस वार्ता एवं तकनीकी प्रदर्शन का आयोजन किया गया। आयोजित कार्यक्रम में कई गणमान्य अतिथि मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

प्रेस वार्ता के दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए ऑर्थोपेडिक्स एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट विभागाध्यक्ष तथा रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट विशेषज्ञ डॉ. अश्विनी गौरव ने कहा कि वेलिस इमेजलेस रोबोटिक-असिस्टेड टेक्नोलॉजी जॉइंट रिप्लेसमेंट शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में सटीकता और सुरक्षा का नया मानक स्थापित कर रही है। उन्होंने बताया कि यह तकनीक शल्य चिकित्सा से पहले मरीज के जोड़ की स्थिति का सूक्ष्म विश्लेषण करती है, जिसके आधार पर मरीज की शारीरिक संरचना के अनुरूप विस्तृत शल्य योजना तैयार की जाती है। शल्य प्रक्रिया के दौरान यह प्रणाली तात्कालिक जानकारी और अत्यंत सटीक माप उपलब्ध कराकर कृत्रिम जोड़ की सही स्थिति सुनिश्चित करने में सर्जन की सहायता करती है।

डॉ. अश्विनी गौरव ने स्पष्ट करते हुए आगे कहा कि रोबोट स्वयं किसी प्रकार की शल्य चिकित्सा नहीं करता। संपूर्ण शल्य प्रक्रिया प्रशिक्षित एवं अनुभवी सर्जन द्वारा ही की जाती है। रोबोटिक प्रणाली केवल चिकित्सक को अधिक सटीक जानकारी, संतुलित माप और वास्तविक समय में तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराती है, जिससे प्रत्येक मरीज के लिए उपचार को अधिक सुरक्षित, नियंत्रित और प्रभावी बनाया जा सके।

उन्होंने बताया कि पारंपरिक जॉइंट रिप्लेसमेंट की तुलना में रोबोटिक-सहायता प्राप्त तकनीक से कृत्रिम जोड़ की बेहतर स्थापना सुनिश्चित करने में सहायता मिलती है। इससे जोड़ की प्राकृतिक कार्यप्रणाली को ध्यान में रखते हुए उपचार की योजना बनाई जा सकती है। साथ ही, आसपास के स्वस्थ ऊतकों एवं मांसपेशियों को अपेक्षाकृत कम प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है, जिससे शल्य चिकित्सा के बाद दर्द एवं रक्तस्राव कम होने, संक्रमण की संभावना घटने, अस्पताल में कम समय तक भर्ती रहने तथा मरीज के अपेक्षाकृत शीघ्र सामान्य जीवन में लौटने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम जोड़ की सटीक एवं संतुलित स्थापना उसके दीर्घकालिक प्रदर्शन और बेहतर परिणामों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डॉ. अश्विनी गौरव ने कहा कि अब बिहार सहित पूरे पूर्वी भारत के मरीजों को इस प्रकार की अत्याधुनिक रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सुविधा के लिए अन्य महानगरों पर निर्भर रहने की आवश्यकता काफी हद तक कम होगी। इससे मरीजों को समय, धन और संसाधनों की बचत के साथ अपने क्षेत्र में ही विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा।

इस अवसर पर जीवनदान हेल्थ के प्रबंधक एवं निदेशक डॉ. प्रशांत कुमार ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य बिहार एवं पूर्वी भारत के लोगों को महानगरों के समान अत्याधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत के पहले ड्रेगर मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर की स्थापना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इसी क्रम में जीवनदान हेल्थ के मेडिकल सुपरिटेंडेंट एवं एचओडी यूरोलॉजी डॉ. अंकुर अकेला ने कहा कि इस आधुनिक शल्य कक्ष में उन्नत संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था, अत्याधुनिक वायु शुद्धिकरण प्रणाली, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप अधोसंरचना तथा आधुनिक चिकित्सीय सुविधाएँ उपलब्ध हैं, जिससे मरीजों को सुरक्षित वातावरण में बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जीवनदान हेल्थ का प्रयास है कि अत्याधुनिक तकनीक का लाभ अधिक से अधिक मरीजों तक किफायती लागत पर पहुँचाया जाए, ताकि उन्हें बेहतर उपचार के लिए दूसरे शहरों का रुख न करना पड़े।

प्रेस वार्ता के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों को वेलिस इमेजलेस रोबोटिक-असिस्टेड सिस्टम का तकनीकी प्रदर्शन भी कराया गया। विशेषज्ञों ने शल्य चिकित्सा की योजना, प्रक्रिया के विभिन्न चरणों, सुरक्षा मानकों तथा इस तकनीक की कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। इसके बाद आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में पत्रकारों ने तकनीक की उपयोगिता, मरीजों की पात्रता, उपचार प्रक्रिया, स्वास्थ्य लाभ की अवधि तथा भविष्य में इसकी संभावनाओं से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया।

कार्यक्रम में एचओडी एनेस्थीसिया डॉ. राजेश कुमार, सीनियर जनरल मैनेजर स्वाजीत ठाकुर, ऑपरेटिंग हेड रोहित कुमार, बिलिंग हेड शैलेश कुमार सहित अस्पताल के चिकित्सक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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