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बिहार की जल-जरूरतों पर विचार जरूरी, ये हमारे हक और भविष्य की बात – निशांत

पटना। को वैशाली में जदयू के ‘‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन हुआ। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत कुमार विशेष रूप से शामिल हुए। इस कार्यक्रम के तहत पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय कुमार झा एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री उमेश सिंह कुशवाहा का गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों – बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार – में संवाद निर्धारित है, जो इस संधि के कारण सबसे अधिक प्रभावित हैं। इस जन-जागरुकता अभियान का शुभारंभ 5 सितंबर को बक्सर से हुआ, जबकि समापन कटिहार में होगा क्योंकि बिहार में गंगा बक्सर से प्रवेश करती है और कटिहार से निकलती है। इस मौके पर वैशाली के हिलालपुर स्थित सेंट जाॅन्स एकेडमी में आयोजित भव्य कार्यक्रम में विधायक श्री सिद्धार्थ पटेल, विधायक श्री महेन्द्र राम, प्रदेश महासचिव श्री जागेश्वर राय, प्रदेश महासचिव सह कार्यक्रम प्रभारी श्री शंभू कुशवाहा, जिलाध्यक्ष श्री सुभाष चन्द्र सिंह सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारीगण और हजारों की संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान इस विषय पर पार्टी द्वारा तैयार की गई डाॅक्यूमेंट्री फिल्म खास तौर से दिखाई गई। साथ ही विस्तृत जानकारी वाला पम्फलेट भी बांटा गया। अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय कुमार झा ने कहा कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई यह संधि भारत के, खासकर बिहार के हित में नहीं है, इसलिए इसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए और अगर कोई संधि होती भी है तो बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। इस जल संधि के कारण बिहार का जल-प्रबंधन बुरी तरह बिगड़ा है और हम गंभीर जल-संकट का सामना कर रहे हैं। श्री संजय कुमार झा ने आगे कहा कि इस संधि के कारण शुष्क मौसम में सिर्फ गंगा ही नहीं, बल्कि बिहार की आंतरिक नदियों से भी पानी खींचकर बांग्लादेश को दिया जाता है। बिहार और केन्द्र की तत्कालीन सरकार में बैठे लोगों ने बिहार के हितों की बलि चढ़ा दी। उन लोगों ने यह नहीं सोचा कि ऐसा करके वे बिहार के किसानों की सिंचाई, लोगों का पेयजल, उद्योगों की पानी की जरूरत, लाखों लोगों की आजीविका और राज्य के युवाओं का भविष्य दांव पर लगा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि जदयू का अभियान किसी के खिलाफ नहीं है, यह बिहार के हक और भविष्य की बात है। बिहार की जल जरूरतों पर गंभीरता से विचार का समय आ गया है। फरक्का बराज और इस संधि के कारण बिहार को पिछले तीन दशकों से पर्यावरणीय और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। गंगा में भारी गाद जमा होने और प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित होने से उत्तर बिहार में बाढ़ की समस्या गंभीर होती है। वहीं सिंचाई, पेयजल और विकास के लिए बिहार की जल जरूरतों पर भी असर पड़ता है। हमारे नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी लम्बे समय से इस विषय को लेकर बिहार की चिन्ता सामने रखते रहे हैं। इस अभियान के माध्यम से हमलोग बिहार की आवाज और गंगा से जुड़़े सवाल देश के सामने ला रहे हैं ताकि फरक्का जल संधि पर पुनर्विचार हो। प्रदेश अध्यक्ष श्री उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि फरक्का बराज और फरक्का जल संधि से बिहार को दोतरफा नुकसान हो रहा है। जहाँ फरक्का बराज के कारण गंगा में गाद जमा होने से उसका तल ऊँचा हो गया है और उसके कारण हमें हर साल बाढ़़ का सामना करना पड़ता है, वहीं फरक्का जल संधि के कारण हमें अपने हिस्से का पानी भी बांग्लादेश को देना पड़ता है और इस कारण हमारे कई जिलों में सूखे की स्थिति आ जाती है। इस अंतर्राष्ट्रीय संधि का 73ः बोझ अकेला बिहार उठा रहा है, ये बिहार के साथ अन्याय नहीं तो और क्या है? श्री कुशवाहा ने श्री संजय कुमार झा को धन्यवाद दिया कि उन्होंने संसद में इस मुद्दे को उठाया और उनके प्रयासों से यह राष्ट्रीय विमर्श का विषय बना। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत कुमार के प्रति आभार जताया कि उनके शामिल होने से अभियान को नई ऊर्जा मिली।

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