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मखाना सेवा केंद्र के माध्यम से मशीनीकरण एवं मखाना इको-सिस्टम का डिजिटलीकरण पर एक दिवसीय कॉन्क्लेव सम्पन्न।

पटना। पारंपरिक मखाना क्षेत्र को आधुनिक, तकनीक-आधारित एवं समावेशी इकोसिस्टम में रूपांतरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत ब्लैकनट एग्रीफूड मशीनरी प्रा. लि., सृष्टि फाउंडेशन तथा बिहार राज्य सहकारी मत्स्यजीवी सहकारी संघ के संयुक्त तत्वाधान में “मखाना सेवा केंद्र के माध्यम से मशीनीकरण एवं मखाना इको-सिस्टम का डिजिटलीकरण” पर एक दिवसीय कॉन्क्लेव नेशनल डॉल्फिन रिसर्च सेंटर पटना के ऑडिटोरियम में सम्पन्न हुआ। मखाना बिहार में हजारों किसानों और परंपरागत मछुआरा समुदायों की आजीविका का प्रमुख आधार है। राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बढ़ती मांग के बावजूद यह क्षेत्र आज भी कम मशीनीकरण, बिखरी हुई सेवा-प्रणाली, कटाई के बाद होने वाले नुकसान तथा मूल्य श्रृंखला में डिजिटल एकीकरण की कमी जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य इन चुनौतियों का समाधान एक सुव्यवस्थित, तकनीक-सक्षम एवं विस्तार योग्य विकास मॉडल के माध्यम से करना है, जिसका केंद्र बिंदु मखाना सेवा केंद्र की अवधारणा हैकृजो मखाना उत्पादकों, मछुआरों, प्रोसेसरों और उद्यमियों के लिए एक वन-स्टॉप संस्थागत सहायता प्रणाली के रूप में कार्य करेगाकृसाथ ही “क्रॉप्टो” ऐप के माध्यम से मखाना इको-सिस्टम का डिजिटलीकरण किया जाएगा।विशिष्ट अतिथि एवं सहभागी संस्थान इस कॉन्क्लेव में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, सहकारी संस्थाओं, अनुसंधान संस्थानों, इनक्यूबेटरों एवं कॉरपोरेट जगत के वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रतिनिधि ने भाग लिया, जिनमें प्रमुख हैः- श्री अभिषेक कुमार, उद्यान निदेशक बिहार सरकार, श्री हिमांशु शर्मा, सीईओ एवं श्री समीर कुमार, जीविका, श्री ऋषिकेश कश्यप, प्रबंध निदेशक, सुश्री सिमरन, निदेशक, श्री रवि राज, मखाना निर्यात एवं विपणन प्रबंधक, बिहार राज्य सहकारी मत्स्यजीवी सहकारी संघ (COFFED), श्री आनंद प्रकाश, क्षेत्रिय अधिकारी, एपीडा, डॉ. गोपाल शर्मा, अंतरिम निदेशक, नेशनल डॉल्फिन रिसर्च सेंटर (NDRC), पटना, डॉ. मनोज कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक, राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र (NRCM), दरभंगा इसके अतिरिक्त, मखाना क्षेत्र से जुड़े प्रमुख कॉरपोरेट्स एवं बल्क खरीदार जैसे DS Group, MOM, ITC (CSR) तथा Pidilite (CSR) के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। कॉन्क्लेव में प्रमुख रूप से मखाना की खेती, कटाई एवं प्रसंस्करण का मशीनीकरण, मखाना सेवा केंद्र के माध्यम से एकीकृत सेवा-प्रदान, किसानों के पंजीकरण, ट्रेसबिलिटी एवं मार्केट लिंकेज हेतु डिजिटल टूल्स एवं सतत क्षेत्रीय विकास के लिए संस्थागत सहयोग को सुदृढ़ करना जैसे विषयों पर चर्चा किया गया। कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कॉफ्फेड के प्रबंध निदेशक श्री ऋषिकेश कश्यप ने राज्य एवं केन्द्र सरकार मखाना पर लग रहे 5 प्रतिशत जीएसटी को हटाने, मखाना का बीमा करने एवं बीमा का प्रिमियम शत प्रतिशत वहन करने, बाढ-सुखाड़, बीमारी एवं प्राकृतिक आपदा में क्षति पर मुआवजा देने, मखाना का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने, राज्य के सभी मछुआ समितियों में मखाना की खेती हेतु उन्नत गुणवत्ता का बीज उपलब्ध कराने, मखाना के प्रसंस्करण, भण्डारण, ब्रांडिग एवं निर्यात हेतु शत प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराने, मछुअ समितियों को ऋण हेतु सरकार की गारण्टी उपलब्ध कराने, मखाना क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने, ट्रेड फेयर में लग रहे शुल्क को माफ करने मखाना के विकास हेतु प्रशिक्षण की व्यवस्था करने मखाना बोर्ड में राज्य के शीर्ष सहकारी संघ कॉफ्फेड को शामिल करने का मांग रखा। कॉन्क्लेव से पूर्व अपने विचार साझा करते हुए ईआर. वरुण गुप्ता, संस्थापक एवं निदेशक, ब्लैकनट एग्रीफूड मशीनरी प्रा. लि., ने कहा कि मशीनीकरण और डिजिटल एकीकरण अब विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता बन चुके हैं। इससे उत्पादकता में वृद्धि, श्रम-भार में कमी, गुणवत्ता सुधार तथा किसानों की आय में स्थायी बढ़ोतरी संभव होगी। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य किसानों एवं पारंपरिक समुदायों को सशक्त बनाते हुए एक पारदर्शी, कुशल एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी मखाना इको-सिस्टम का निर्माण करना है। यह कॉन्क्लेव नीति संवाद, तकनीक प्रसार एवं विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग के लिए एक रणनीतिक मंच सिद्ध होगा तथा बिहार को आधुनिक मखाना उत्पादन एवं प्रसंस्करण का राष्ट्रीय एवं वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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