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मधुमक्खी पालन कर आत्मनिर्भर हो रही हैं थारू महिलाएं।

बेतिया  पश्चिमी चंपारण जिला के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल किनारे बसे  कदमहिया गांव की 35 महिलाएं मधुमक्खी पालन कर आत्मनिर्भर बन रहीं हैं और आर्थिक रूप से सुदृढ़ भी हो रही हैं। इन महिलाओं को प्रशिक्षण देने वाले सत्येंद्र सिंह बताते हैं की विगत 3 साल से आदिवासी महिलाओं का समूह शहद उत्पादन कर रहा है जिससे प्रति वर्ष 10 क्विंटल शहद उत्पादन हो रहा है जो औषधीय गुणों से भरपूर है। विदित हो कि सरसों के फूलों में मधुमक्खी पालन के लिए बॉक्स लगाए जाते हैं जिसका रस चूस कर ये मधुमक्खियां शहद पैदा करती हैं। इतना हीं नहीं ऑफ सीजन में वीटीआर जंगल के विभिन्न औषधीय पेड़ों के फूल का रस चूस कर ये अपना छत्ता बॉक्स में आकर लगाती हैं। वहीं शहद उत्पादन में जुटी महिला सुमन देवी बताती हैं की घर का काम काज करते हुए भी थरुहट की महिलाएं अब शहद उत्पादन कर अपना किस्मत संवार रहीं हैं। 35 महिलाएं इससे जुड़ी हैं और प्रति महिला 10 बॉक्स लगाती हैं। एक बॉक्स से 10 से 15 किलो शहद निकलता है जिससे अच्छा मुनाफा हो रहा है जिससे उनका जीवन यापन काफी अच्छे से चल रहा है तथा अब उनके बच्चे भी प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे हैं। महिला ने बताया की उनके शहद में मिलावट नहीं रहती है जिस वजह से शहद की अच्छी डिमांड है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार और प्रशासन से इसके ब्रांडिंग में मदद मिलती तो इस कारोबार से ज्यादा से ज्यादा महिलाएं जुड़तीं और ज्यादातर लोगों को इस रोजगार का लाभ मिल पाता।
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