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राज्यसभा चुनाव: बिहार में कांग्रेस के गायब विधायकों पर टिकी निगाहें, तेजस्वी बोले- अफवाह

बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हो रहा चुनाव इस बार पूरी तरह राजनीतिक रोमांच में बदल गया है. ऐसे चुनाव विधानसभा के संख्या बल के आधार पर आसानी से तय हो जाते हैं, लेकिन इस बार छह उम्मीदवार मैदान में होने से मुकाबला रोचक हो गया है. ज्यादा चर्चा कांग्रेस विधायकों की भूमिका को लेकर है, क्योंकि उनके वोट महागठबंधन के उम्मीदवार के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं. इसी बीच गायब कांग्रेस विधायकों के मतदान से पहले नजर नहीं आने की खबरों ने सियासी अटकलों को और तेज कर दिया. इस चुनाव में कांग्रेस के छह विधायक निर्णायक भूमिका में माने जा रहे हैं. महागठबंधन के उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए इन विधायकों का समर्थन बेहद जरूरी माना जा रहा है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह भी है कि कुछ विधायकों के अलग-अलग दलों से पुराने रिश्ते रहे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मतदान के समय सभी विधायक पूरी तरह पार्टी लाइन पर रहेंगे या कोई अलग संकेत भी सामने आ सकता है. खबर लिखे जाने तक कांग्रेस के वोट करने वाले विधायक कमरूल होदा, अभिषेक रंजन,अबिदुर रहमान और मनोहर प्रसाद वोट कर चुके है. मनोज विश्वास और सुरेन्द्र प्रसाद कुशवाहा अभी तक नहीं पहुंचे है. कांग्रेस ने अभी तक अपने विधायक दल का नेता और सचेतक घोषित नहीं किया है. ऐसे में पार्टी के विधायक बिना औपचारिक नेतृत्व के ही इस महत्वपूर्ण मतदान में हिस्सा ले रहे हैं. इस स्थिति में हर विधायक का फैसला चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकता है. यही वजह है कि कांग्रेस के हर विधायक पर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है. हालांकि देर रात कुछ कांग्रेस विधायकों के होटल नहीं पहुंचने की खबरों ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी. बाद में पार्टी नेताओं ने इसे महज अफवाह बताते हुए कहा कि सभी विधायक महागठबंधन के साथ हैं. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कांग्रेस विधायकों के गायब होने की खबरों को सिरे से खारिज किया. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ अफवाह है और भाजपा की ओर से भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है. तेजस्वी ने दावा किया कि महागठबंधन के सभी विधायक पूरी तरह एकजुट हैं और उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेंगे. राज्यसभा चुनाव में एक सीट जीतने के लिए 41 वोट की जरूरत है. बिहार विधानसभा में कुल 243 विधायक हैं और पांच सीटों के लिए मतदान हो रहा है. संख्या बल के आधार पर एनडीए के पास चार सीटें लगभग सुरक्षित मानी जा रही हैं, लेकिन पांचवीं सीट के लिए अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ सकती है. यही वजह है कि इस सीट को लेकर दोनों खेमों में राजनीतिक रणनीति और जोड़-तोड़ अपने चरम पर है.

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