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मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और संवाद से ही बचेगा जीवन : प्रो. शांडिल्य

टीपीएस कॉलेज में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम एवं जन-जागरूकता पैदल मार्च

टीपीएस कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग द्वारा विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम एवं जन-जागरूकता पैदल मार्च का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा आत्महत्या की रोकथाम के लिए संवाद, भावनात्मक सहयोग और समय पर सहायता की आवश्यकता का संदेश देना था।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कॉलेज के प्राचार्य प्रो. तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं आज गंभीर सामाजिक एवं मानसिक स्वास्थ्य चुनौती हैं। उन्होंने उपलब्ध आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वभर में प्रतिवर्ष लगभग 7 से 8 लाख लोग आत्महत्या करते हैं और बड़ी संख्या में लोग आत्महत्या का प्रयास भी करते हैं। यह समस्या विशेष रूप से 29 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में चिंता का विषय बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए परिवार और मित्रों के बीच निरंतर बातचीत, संवेदनशील व्यवहार तथा भावनात्मक सहयोग बेहद जरूरी है।

प्राचार्य ने कहा कि मानसिक तनाव से गुजर रहे व्यक्ति की बात को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। समय पर संवाद, भावनात्मक सहयोग और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ की सहायता किसी व्यक्ति के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने तथा अपने आसपास के लोगों की परेशानियों के प्रति संवेदनशील बनने की अपील की।

भावनाओं को दबाएं नहीं, व्यक्त करें : प्रो. रूपम, मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. रूपम ने आत्महत्या के मनोवैज्ञानिक एवं जैविक कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब व्यक्ति अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के बजाय उन्हें लगातार दबाता है, तो तनाव और मानसिक दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को परिवार एवं मित्रों से खुलकर बातचीत करने, अपनी रुचियों के लिए समय निकालने, डायरी लेखन तथा सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शुरुआती स्तर पर परिवार और समाज का भावनात्मक सहयोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पोस्टर, स्लोगन और पैदल मार्च से दिया जागरूकता का संदेश कार्यक्रम में मनोविज्ञान विभाग के छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। विद्यार्थियों ने आत्महत्या रोकथाम एवं मानसिक स्वास्थ्य विषय पर आकर्षक पोस्टर तैयार किए, ओजस्वी भाषण दिए तथा प्रेरक स्लोगन के माध्यम से लोगों को जागरूक किया।

इसके बाद छात्र-छात्राओं ने महाविद्यालय के आसपास के क्षेत्रों एवं मोहल्लों में जन-जागरूकता पैदल मार्च निकाला। हाथों में पोस्टर एवं जागरूकता संदेश लिए विद्यार्थियों ने स्थानीय नागरिकों से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने तथा तनाव या कठिन परिस्थिति से गुजर रहे लोगों का साथ देने की अपील की। उन्होंने संदेश दिया कि किसी व्यक्ति की परेशानी को नजरअंदाज न करें, उसकी बात सुनें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ सहायता लेने के लिए प्रेरित करें।

समारोह में डॉ. विजय कुमार सिन्हा, प्रो. हेमलता सिंह, प्रो. अंजलि प्रसाद, प्रो. नवेंदु शेखर, डॉ. विनय भूषण कुमार, डॉ. प्रशांत कुमार, डॉ. उमेश कुमार, डॉ. रवि प्रभाकर, डॉ. मुकुंद कुमार, डॉ. शशि भूषण चौधरी, प्रो. कृष्णनंदन प्रसाद, डॉ. ज्योत्स्ना कुमारी, डॉ. सानंदा सिन्हा, प्रो. शाइस्ता नूरी, डॉ. दीपिका शर्मा, डॉ. शशि प्रभा दुबे, डॉ. तरन्नुम, डॉ. हंस कुमार सिंह, डॉ. चंद्रशेखर ठाकुर, डॉ. शशि शेखर सिंह, डॉ. इफ्त नसरीन एवं डॉ. नुपूर सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।

 कार्यक्रम के माध्यम से टीपीएस कॉलेज ने “बात करें, साथ दें और जीवन बचाएं” का संदेश देते हुए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील एवं सहयोगात्मक वातावरण बनाने का आह्वान किया।

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