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नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ने पर पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा ने दी पीएम मोदी को बधाई, लेख लिखकर की तारीफ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है. बतौर पीएम उन्होंने 12 साल पूरे कर लिए हैं. उन्होंने लंबे समय तक पीएम पद पर बने रहने के पंडित नेहरू के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. इसके साथ ही वो देश के सबसे लंबे कार्यकाल तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने वाले नेता बन गए हैं. पीएम की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए उन्हें बधाइयां मिल रही हैं. सत्ता पक्ष हो या विपक्ष तमाम दिग्गज नेता उन्हें मुबारकबाद देते हुए उनके नेतृत्व की सराहना कर रहे हैं. इसकी कड़ी में पूर्व प्रधानमंत्री और जनता दल (सेक्युलर) के प्रमुख एचडी देवगौड़ा ने पीएम मोदी की खुलकर तारीफ की है. उन्होंने कहा कि मोदी इसलिए इतने सफल हैं क्योंकि वो सोच-समझकर फ़ैसले लेते हैं. उन्होंने कहा कि पीएम ने राष्ट्रीय हितों की रक्षा में कभी कोई समझौता नहीं किया. एचडी देवगौड़ा ने एक न्यूज पेपर में आर्टिकल लिखा है. जिसमें उन्होंने पीएम मोदी की सराहना की. उन्होंने कहा कि मोदी अब भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधानमंत्री बन गए हैं. उन्होंने नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. देवगौड़ा ने कहा कि इससे भी अहम बात ये है कि पीएम की ये उपलब्धि इस बात का बड़ा सबूत है कि भारत में लोकतंत्र न सिर्फ बचा रहा, बल्कि फला-फूला भी. पूर्व पीएम ने कहा कि 1947 में कई प्रतिभाशाली और समर्पित लोगों के बीच से जवाहरलाल नेहरू को देश का पहला प्रधानमंत्री चुना गया था यह सब बहुत ही खास हालात में हुआ था. उन्होंने कहा कि असल में जनता पर गांधीजी के नैतिक प्रभाव की वजह से ही यह नियुक्ति संभव हो पाई थी. इसके बाद 1952 के पहले आम चुनाव में नेहरू के साथ गांधीजी का आशीर्वाद और आज़ादी की लड़ाई का गौरवशाली प्रभाव दोनों ही शामिल थे. उन्होंने कहा कि उस समय कांग्रेस पार्टी का एकाधिकार था. उसे किसी राजनीतिक मुकाबले का सामना नहीं करना पड़ा. उसे कोई राजनीतिक चुनौती नहीं थी. उन्होंने कहा कि हालांकि आम चुनाव में 53 राजनीतिक पार्टियों ने हिस्सा लिया लेकिन उनकी मौजूदगी और असर बेहद कम था यानी न के बराबर. उन्होंने कहा कि उस दौर से लेकर 2014 तक आते-आते भारत पूरी तरह बदल चुका था.2014 में पहली बार और 2024 में तीसरी बार मोदी के प्रधानमंत्री बनने तक भारत एक बिल्कुल अलग देश बन गया. आकार, विविधता और अर्थव्यवस्था के मामले में तो यह लगभग पहचान से परे हो चुका था. पूर्व प्रधानमंत्री के मुताबिक 1952 में प्रधानमंत्री बनना 2014 या 2024 के मुकाबले आसान था. उन्होंने कहा कि 1996 में जब वो खुद प्रधानमंत्री बने तब तक देश के हालात और राजनीतिक के नियम बिल्कुल बदल चुके थे. उन्होंने कहा कि देश अब ज्यादा सवाल करने वाला, ज्यादा जुड़ाव रखने वाला और ज्यादा परिपक्व हो गया था. उन्होंने कहा कि नेहरू-गांधी परिवार के बाहर के प्रधानमंत्रियों के पास कोई खास विरासत या चमक-दमक नहीं थी. दूसरों के पास आगे बढ़ने के लिए कोई खास सुविधा, खानदानी रसूख या संरक्षण नहीं था. उन्होंने कहा कि मोदी और खुद उनके मामले में वो सामाजिक और सांस्कृतिक रसूख भी नहीं था जो कई अन्य प्रधानमंत्रियों को मिला था. उन्होंने कहा कि ‘मैं ज़्यादा समय तक पद पर नहीं रहा, मेरा कार्यकाल सिर्फ़ 11 महीने का था. और मैं सोचता हूं कि मोदी किस आशीर्वाद से बिना थके शीर्ष पर बने हुए हैं.न तो उनमें थकान दिखती है और न ही उन्हें चुनने वाले लोगों में. पद पर रहते हुए उनकी सहनशक्ति और काम करने की क्षमता वाकई बहुत खास है’.पूर्व पीएम ने कहा कि आंकड़ों पर नजर डालें तो ये नेहरू के समय से अब तक हुए बड़े बदलावों को दिखाते हैं. राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के ये आंकड़े बदलाव की कहानी को बयां करते हैं. उन्होंने कहा कि अगर सिर्फ़ राजनीतिक मुकाबले की बात करें तो 1952 के चुनावों में मैदान में सिर्फ 53 पार्टियां थीं, जबकि 2024 में मोदी का मुकाबला 2,593 पार्टियों से था. नेहरू के समय मतदाताओं की संख्या 17 करोड़ थी, जो 2014 तक बढ़कर 83 करोड़ हो गई. भारत की आबादी जो 1952 में 34 करोड़ थी आज 146 करोड़ से ज़्यादा है. यानी चुनावी लड़ाई का मैदान कई गुना बड़ा, जटिल और चुनौतीपूर्ण हो गया है. इतनी भीड़, इतनी विविधता और इतनी प्रतिस्पर्धा के बीच लगातार चुने जाना आसान नहीं है.

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