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पीएम मोदी ने कहा कि चार दशकों बाद ऑस्ट्रिया के चांसलर की भारत यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है

दुनिया इस वक्त जिस तनावपूर्ण दौर से गुजर रही है, उसमें ताकत और टकराव की राजनीति फिर से केंद्र में नजर आ रही है. ऐसे माहौल में भारत की ओर से शांति और संवाद का संदेश देना अपने आप में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है. दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान इसी सोच को सामने लाता है, जहां उन्होंने साफ कहा कि किसी भी समस्या का हल सैन्य टकराव से नहीं निकल सकता. यह बयान सिर्फ एक कूटनीतिक लाइन नहीं बल्कि भारत की उस नीति को दर्शाता है जो लंबे समय से बातचीत और संतुलन पर आधारित रही है. खास बात यह है कि यह संदेश ऐसे समय आया है जब यूक्रेन से लेकर वेस्ट एशिया तक हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि भारत न सिर्फ शांति की बात करता है, बल्कि आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दों पर सख्त रुख भी रखता है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद को जड़ से खत्म करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है. यानी एक तरफ जहां भारत संवाद का समर्थन करता है, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा और सख्ती के बीच संतुलन बनाए रखने की नीति भी अपनाता है. पीएम मोदी ने कहा कि चार दशकों बाद ऑस्ट्रिया के चांसलर की भारत यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच हालिया समझौतों के बाद रिश्तों में नया अध्याय शुरू हुआ है. भारत का टैलेंट और ऑस्ट्रिया की इनोवेशन क्षमता मिलकर नए अवसर पैदा कर सकती है. ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर ने अपनी भारत यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिए मील का पत्थर बताया. उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है और यह करीब 3 बिलियन यूरो तक पहुंच चुका है. स्टॉकर ने यह भी बताया कि लगभग 160 ऑस्ट्रियाई कंपनियां भारत में विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं, जो दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को और मजबूत बना रही हैं.
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