प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत एक साल में 59% बढ़ गई है. 24 अगस्त को प्याज का औसत खुदरा भाव 43.53 रुपये प्रति किलो पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी समय यह 27.37 रुपये किलो था. बढ़ती कीमतों से राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने मंगलवार को ‘कांदा एक्सप्रेस’ शुरू करने का ऐलान किया. इसके तहत नासिक से प्याज की खेप विशेष मालगाड़ियों के जरिए उन बड़े शहरों तक पहुंचाई जाएगी, जहां सप्लाई का दबाव ज्यादा है.प्याज की कीमत बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह सप्लाई में आई कमी है. महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है. मार्च-अप्रैल में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से रबी प्याज की फसल और उसके स्टॉक पर असर पड़ा. रबी प्याज की कटाई मार्च-अप्रैल में होती है और इसे अक्टूबर तक बाजार में सप्लाई किया जाता है. ऐसे में पुराने स्टॉक पर असर पड़ने से बाजार में उपलब्धता घट गई और कीमतों पर दबाव बढ़ गया. खरीफ प्याज की अगली फसल पर भी मौसम का असर पड़ा. मानसून देर से आने के कारण किसानों को प्याज की बुवाई में देरी करनी पड़ी. खरीफ प्याज की फसल आमतौर पर सितंबर से नवंबर के बीच आती है. इसका मतलब है कि नई फसल आने तक सप्लाई को लेकर दबाव बना रह सकता है. देश के कई बड़े शहरों में प्याज की कीमतों में औसत से भी ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली है. वहीं, 24 अगस्त को प्याज का औसत थोक भाव 35.58 रुपये किलो रहा, जो एक साल पहले 21.23 रुपये था. यानी थोक कीमत में करीब 68% की बढ़ोतरी हुई है. सरकार का फोकस फिलहाल उन शहरों में प्याज की सप्लाई बढ़ाने पर है, जहां कीमत और उपलब्धता दोनों पर दबाव है. नासिक से प्याज को सीधे प्रमुख बाजारों तक पहुंचाने से सप्लाई बेहतर करने और कीमतों पर दबाव कम करने की कोशिश की जाएगी. थोक कीमतों में बढ़ोतरी का असर खुदरा बाजार तक पहुंच रहा है. मंत्रालय ने भी सप्लाई की स्थिति को देखते हुए प्याज की खरीद कीमत मई के 12.70 रुपये से बढ़ाकर 26.45 रुपये प्रति किलो कर दी है. इसके अलावा त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से कारोबारियों की ओर से स्टॉक बढ़ाने की कोशिश ने भी कीमतों पर असर डाला है. ऐसे में आने वाले दिनों में प्याज के दाम पर सबसे ज्यादा नजर नई खरीफ फसल की आवक और सप्लाई में सुधार पर रहेगी.
