पश्चिम बंगाल चुनाव में प्रचार के अंतिम दिन बैरकपुर में रैली करने पहुंच पीएम मोदी ने विजय संकल्प रैली में कहा कि 1857 में इसी बैरकपुर की धरती ने आजादी की पहली लड़ाई को ताकत दी थी. अब यही धरती परिवर्तन की राह को और भी ज्यादा प्रशस्त कर रही है. इस चुनाव में ये मेरी आखिरी सभा है. मैं जहां-जहां भी गया वहां बंगाल के लोगों का जो मिसाज देखा हूं, उसके बाद इसी उम्मीद में यहां से जा रहा हूं कि 4 मई के बाद नई बीजेपी सरकार के शपथ ग्रहण में मुझे आना ही है. मैं पिछले तीन चार दशक से देश के कोने-कोने में जाता रहा हूं. राजनीति और बीजेपी में आने के बाद कार्यकर्ता के रूप में पार्टी जो भी काम कहती है वो मैं करता हूं. चुनाव की जिम्मेदारियां संभालना भी इसी का हिस्सा रहा है. पार्टी जो जिम्मेदारी सौंपती है उसे पूरा करने में मैं ना दिन देखता हूं, ना रात, ना मौसम देखता हूं, चल पड़ता हूं. साथियों जब से घर छोड़ा है तब से मुझे आप सबके बीच रहने में सुख और सूकून मिलता है. आप ही मेरा परिवार हैं. इस भागदौड़ में यह स्वभाविक है कि कुछ थकान हो जाए. आखिर हम सबके शरीर की क्षमता है. 30-40 साल पहले भी ऐसी भागदौड़ में थकान तो होती ही थी. लेकिन इस चुनाव में अलग ही अनुभव कर रहा हूं. इतनी गर्मी और इतनी रैलियों के बाद भी मुझे बंगाल में जरा भी थकान महसूस नहीं हुई. आपको याद होगा जब जनवरी 2024 अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन हुआ था. उससे पहले मैंने 11 दिनों का अनुष्ठान व्रत किया था. मैं दक्षिण भारत के अनेको मंदिरों में गया और देवी देवताओं का आशीर्वाद लिया था. इस चुनाव में भी मुझे वैसी ही अनुभूति हुई है, जैसी किसी देवी मंदिर के दर्शन के समय होती है. इसकी वजह बंगाल के प्रति जो मेरा लगाव रहा है. शक्ति की भक्ती रही है. मेरे व्यक्तिगत जीवन की आध्यात्मिक यात्रा का ये ऊर्जा केंद्र रहा है, बंगाल के महान व्यक्तित्व की प्रेरणा रही है और ईश्वर रूपी आप जनता जर्नादन का अपार प्रेम रहा है. बंगाल के महान व्यक्तित्वों की प्रेरणा रही है और ईश्वर रूपी आप जनता जनार्दन का अपार प्रेम रहा है. बंगाल में जो आध्यात्मिक अनुभूति हुई है, बंगाल की इस धरती पर मैंने जो अनुभव किया है, उसे मैं स्वयं पर अपने आप पर बहुत बड़ा आशीर्वाद समझता हूं.
