14 नवंबर को आए बिहार चुनाव के नतीजे ने कांग्रेस की राजनीतिक लड़ाई को जटिल बना दिया है। कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी रामलीला मैदान से लेकर संसद भवन तक सरकार और चुनाव आयोग को घेरने की तैयारी कर रहे हैं। राहुल गांधी मानना है कि यह लड़ाई संविधान और लोकतंत्र के रक्षा की है। इसे संड़क से संसद तक लड़ना होगा। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल के करीबी और सचिवालय के सूत्र बिहार राज्य से आते हैं। उन्हें बिहार की जमीनी स्थिति का अंदाजा है। बताते हैं कि जिस तरह से चुनाव आयोग की ‘एसआईआर’ प्रक्रिया ने बिहार के चुनाव को प्रभावित किया है, उससे आशंकाएं सही साबित हुई हैं। बताते हैं राहुल गांधी ने चुनाव का नतीजा आने के बाद इसे चौकाने वाला और निराशाजनक बताया था। नतीजा आने के बाद वह थोड़ा गंभीर और तनाव में थे। कांग्रेस पार्टी खुद को इस चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल और महागठबंधन के अन्य सहयोगी दलों का ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ मानती है। हालांकि पार्टी के रणनीतिकार मानते हैं कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान ऐन वक्त पर कुछ गलत फैसले हो गए। बिहार कांग्रेस के एक बड़े नेता ने फोन पर बताया कि चुनाव प्रतिक्रया के बीच में कृष्णा अल्लावरु का प्रकरण और महागठबंधन में आपसी तालमेल न बन पाने की स्थिति ने काफी नुकसान पहुंचाया। यह विपक्ष के लिए सबक लेने जैसा है। इसका पूरे चुनाव पर असर पड़ा। पार्टी के एक महासचिव का कहना है कि हम पूरी एकजुटता और ताकत से नहीं लड़ पाए। ‘एसआईआर’ का मुद्दा जिस तरह से उठा था, उसे जमीन पर जनता के बीच में ले जाने, क्षेत्रीय मुद्दों से जनता को जोड़ने में कहीं कोई कमी रह गई। राहुल गांधी ने पहले ही बिहार चुनाव में हार के कारणों पर गहराई से समीक्षा करने का बयान दे दिया है। बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम और पूर्व अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह के पास इसके अपने-अपने कारण हैं। यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि अखिलेश प्रसाद सिंह बिहार के जमीनी नेता हैं। उनकी बिहार की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक स्थिति को लेकर एक समझ है। चुनाव नतीजा आने के बाद पार्टी ने अपने 12 राज्यों के कांग्रेस प्रभारियों, राज्य ईकाई के प्रमुखों, विधायक दल के नेताओं, सचिवों आदि की समीक्षा बैठक बुलाई थी। राज्यसभा सांसद और म.प्र. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भी संगठन और संगठनात्मक ढांचे को लेकर अपने कई सवाल हैं। माना जा रहा है कि पार्टी के फोरम पर भविष्य की समीक्षा के दौरान कांग्रेस के नेता स्पष्ट तौर से अपनी राय रखेंगे। बिहार के एमएलसी शकील अहमद खान को भी अपनी पार्टी से कुछ कहना है। बताते चलें कि बिहार से ही आने वाले पूर्व केन्द्रीय गृहराज्यमंत्री मंत्री शकील अहमद ने भी कांग्रेस से अपना नाता तोड़ लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि जिस तरीके से बिहार में चुनाव की अधिसूचना जारी होने के पहले चुनाव प्रचार अभियान ने जोर पकड़ा, उस रफ्तार को मतदान से पहले तक कायम नहीं रखा जा सका। दूसरे राजद के कार्यकर्ताओं की प्रचार अभियान के तौर-तरीकों ने भी अच्छा संदेश नहीं दिया। फिलहाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बिहार पार्टी की हार और 06 पर सिमट जाने की समीक्षा करने में जुट गए हैं। चुनाव का नतीजा आने के बाद से राहुल गांधी भाजपा के नेताओं के निशाने पर हैं। बिहार चुनाव का नतीजा आने से कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा कह रहे थे कि एनडीए के नेता हार मानकर बंगला खाली कर रहे हैं। अब वह पूरी तरह से पार्टी और अपने नेता राहुल गांधी के बचाव में हैं। कांग्रेस के एक पूर्व मंत्री कहते हैं कि बिहार में हम राष्ट्रीय जनता दल के साथ महागठबंधन के बैनर पर चुनाव लड़ रहे थे। हमारी भूमिका सहयोगी दल की थी। इसलिए इसमें राहुल गांधी पर फोकस करना ठीक नहीं है। राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने अच्छा प्रचार किया है। यह पूछे जाने पर कि क्या इस नतीजे का असर राहुल गांधी के मनोबल पर पड़ा है? सूत्र का कहना है कि राहुल गांधी को सुनिए। वह कह रहे हैं कि संविधान और लोकतंत्र के रक्षा की लड़ाई है। आप समझिए। कांग्रेस इस लड़ाई को जारी रखेगी। दिल्ली के रामलीला मैदान में दिसंबर के दूसरे सप्ताह में कांग्रेस इसके खिलाफ हमला बोलेगी। इससे पहले पार्टी संसद भवन में संसद के शीतकालीन सत्र(एक दिसंबर से 19 नवंबर 2025) के दौरान उसे आईना दिखाने की तैयारी कर रही है। देश में ‘एसआईआर’ को लेकर हस्ताक्षर अभियान चल रहा है। कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि केरल, तमिलनाडु समेत तमाम राज्यों के आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस मुद्दे पर चुप बैठना ठीक नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसके विरोध की घोषणा की और उन्होंने कहा कि पार्टी वोटर लिस्ट से नाम नहीं हटाने देगी। राहुल गांधी ने पार्टी के नेताओं से भी कहा कि वह इस मुद्दे पर आक्रामक तरीके से विरोध करें। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का रवैया निराशाजनक है। इसलिए कांग्रेस पार्टी असली मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से हटाने और फर्जी मतदाताओं को इसमें जोड़ने का पर्दाफाश करने से पीछे नहीं हटेगी। समझा जा रहा है कि कांग्रेस ने इसके लिए अपनी रिसर्च विंग को सक्रिय कर दिया है।
