नई दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने दो आरोपियों को बरी कर दिया है. दोनों को साल 2018 में ISIS-JK से जुड़े होने का आरोप में गिरफ्तार किया गया था. हालांकि कोर्ट ने यह साफ किया कि गिरफ्तार किए गए युवकों के खिलाफ कोई ऐसा सबूत नहीं मिला है जो यह साबित करता हो कि वे ISIS-JK से जुड़े हैं. यही वजह है कि दोनों ही युवको को बरी किया जाता है. कोर्ट ने कहा कि सरकारी पक्ष (प्रॉसिक्यूशन) यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपी सच में ISIS से जुड़े थे. इसलिए उन्हें संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया गया है. मतलब साफ है कि गिरफ्तार किए गए युवकों को सिर्फ यह कहकर जेल में नहीं रखा जा सकता है कि वे आईएसआईएस से जुड़े हुए हैं. ऐसा कहने के लिए पर्याप्त सबूत होना जरूरी है. जो कि इन युवको के खिलाफ नहीं हैं. जस्टिस अमित बंसल ने जमशेद ज़हूर पॉल और परवेज़ राशिद लोन को गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा 18 और 20, और शस्त्र अधिनियम के तहत आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने और ISIS से जुड़ाव के आरोपों से बरी कर दिया है. कोर्ट ने यह भी कहा, “अभियोजन पक्ष यह साबित करने में भी नाकाम रहा कि 06.09.2018 से पहले, दोनों आरोपी ISIS-JK के सदस्य थे. ISIS एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है जो आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने में शामिल है. इसलिए, दोनों आरोपी बरी किए जाने के हकदार हैं. जमशेद ज़हूर पॉल और परवेज राशिद लोन दोनों पर UAPA (आतंकवाद विरोधी कानून) के तहत केस दर्ज किया गया था. आरोप था कि वे ISIS-JK के लिए काम कर रहे थे. इसके साथ ही यह भी आरोप था कि हथियार लेकर आतंकी गतिविधियों की तैयारी कर रहे थे. पुलिस ने 2018 में दोनों को गिरफ्तार किया था.उनके बैग से पिस्तौल और कारतूस मिलने का दावा किया गया था. कहा गया कि वे कश्मीर में हमले की योजना बना रहे थे. एक आरोपी की पहले ही मौत हो चुकी है. एक और आरोपी अभी भी फरार है. कोर्ट के फैसले के बाद फरार आरोपी को राहत मिली है.
