केरल और असम में चुनाव के बाद चुनावी हलचल अब पश्चिम बंगाल तथा तमिलनाडु में बढ़ गई है. देश के बड़े नेता ताबड़तोड़ यहां चुनावी रैली करने में लगे हैं. कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी आज मंगलवार को पश्चिम बंगाल में 3 चुनावी जनसभा करने जा रहे हैं. पार्टी इस बार राज्य में अकेले ही चुनाव लड़ रही है और उसकी यही कोशिश रहेगी कि इस बार न सिर्फ खाता खोला जाए बल्कि सम्मानजनक संख्या में सीटें हासिल कर ली जाए. साल 2021 का चुनाव कांग्रेस के लिए अच्छा नहीं रहा था. वाम मोर्चा के साथ लगातार दूसरी बार कांग्रेस चुनाव मैदान में उतरी तो संयुक्त मोर्चा नाम के इस गठबंधन को हर जगह झटकों का सामना करना पड़ा क्योंकि गठबंधन का खाता तक नहीं खुल सका था. उसे राज्य में कुल पड़े वोटों का 8.7 फीसदी वोट मिले लेकिन ये वोट गठबंधन को एक भी सीट दिला पाने में नाकाफी साबित हुए. एक समय कांग्रेस और वाम दलों का यहां दबदबा हुआ करता था. लेकिन आज ये दल सत्ता की पहुंच से भी दूर हैं. पिछले चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाए थे. कांग्रेस इस बार सटीक रणनीति से चुनाव मैदान में उतर रही है, कहा जा रहा है कि पार्टी ने व्यवस्थित तरीके से चुनाव लड़ने की तैयारी की है. टिकट बंटवारे में जातिगत और राजनीतिक समीकरण का भी खास ख्याल रखा गया है. राहुल गांधी अब चुनाव प्रचार के जरिए वोटर्स को अपने अंदाज में साधने की कोशिश करेंगे. कांग्रेस की नजर सत्ता के शिखर पर पहुंचने की जगह अपनी स्थिति सुधारने पर लगी होगी. उसे अब 0 से शुरुआत करनी होगी. ऐसे में पार्टी उन क्षेत्रों पर ज्यादा फोकस कर रही है जहां उसके लिए सुधार की ज्यादा गुंजाइश दिख रही है. राहुल की आज उत्तरी दिनाजपुर जिले के रायगंज क्षेत्र में चुनावी सभा, इसके बाद वह मालदा जिले में एक जनसभा को संबोधित करेंगे. फिर वह मुर्शिदाबाद में भी एक जनसभा को संबोधित करेंगे. राहुल गांधी की पहली रैली उत्तरी बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर जिले के रायगंज में है. कभी इस जिले में कांग्रेस और वाम दलों का दबदबा हुआ करता था. इसमें कांग्रेस अच्छी स्थिति में हुआ करती थी. 2021 में यहां पर ममता की पार्टी ने 9 में से 7 सीटों पर जीत हासिल की थी तो 2 सीटों पर बीजेपी को जीत मिली. जबकि कांग्रेस-वाम मोर्चा को 5 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा था. लेकिन 2016 के चुनाव में उत्तरी दिनाजपुर की 9 विधानसभा सीटों में कांग्रेस-वाम गठबंधन ने 9 में से 5 सीटों पर जीत हासिल की थी. यहां की रायगंज सीट समेत 3 सीटों पर कांग्रेस तो 2 सीटों पर वाम दलों को जीत मिली. इसी तरह 2011 के चुनाव में भी ममता बनर्जी अपनी तृणमूल कांग्रेस के साथ पहली बार मैदान में उतरी थी और पार्टी ने राज्य में बड़ी जीत जरूर हासिल की. लेकिन कांग्रेस ने इस जिले की 9 में से 5 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे और रानीजंग समेत 3 सीट उसके खाते में गई थी, जबकि 3 सीट वाम दलों के पक्ष में तो एक सीट निर्दलीय के पास गई. टीएमसी को 2 सीट मिली थी. इस चुनाव में टीएमसी और कांग्रेस यूपीए गठबंधन के तहत साथ चुनाव लड़े थे.
बंगाल चुनाव: मालदा, मुर्शिदाबाद और रायगंज में आज राहुल गांधी का प्रचार,
