बेहतरीन फाइटर और टेस्ट पायलट एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को देश का अगला वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ नियुक्त किया गया है. आशुतोष दीक्षित 1 जुलाई को अपना नया पद संभालेंगे. एयर मार्शल को 6 दिसंबर, 1986 को भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल किया गया था. वे नेशनल डिफेंस एकेडमी, खड़कवासला के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज (बांग्लादेश) और नेशनल डिफेंस कॉलेज, नई दिल्ली के पूर्व छात्र हैं. वे एक क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट हैं, जिन्हें मिराज-2000, मिग-21 और जगुआर समेत 20 से ज्यादा तरह के एयरक्राफ्ट उड़ाने का 3,300 घंटे से ज्यादा का अनुभव है. एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने दक्षिणी सेक्टर में एक प्रमुख फाइटर ट्रेनिंग बेस की कमान भी संभाली. यहां उनके नेतृत्व में उस बेस को कमांड का सबसे अच्छा बेस चुना गया. एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट, बैंगलोर में टेस्ट पायलट के तौर पर काम किया. बाद में फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर उन्होंने कई स्वदेशी अपग्रेड और डेवलपमेंट प्रोग्राम में शामिल रहे. इनमें जगुआर और मिग-27 के लिए एवियोनिक्स अपग्रेड भी शामिल हैं. एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स के डायरेक्टर के तौर पर उन्होंने मीडियम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के ट्रायल की प्लानिंग और संचालन में अहम भूमिका निभाई. विंग कमांडर दीक्षित ने अपनी बेहतरीन लीडरशिप में 15 दिसंबर 2004 से 31 मार्च 2005 के बीच 500 घंटे की सफल उड़ान पूरी की. उन्होंने फ्रांस से 10 नए मिराज-2000 विमानों की मंजूरी और सुरक्षित फेरी का संचालन किया. साथ ही मिराज मिशन प्रिपरेशन सिस्टम में सुधार कर ‘एक्सरसाइज गोल्डन ईगल’ और दूसरे मिशन में इसका सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया है. वे एक कुशल कमांडर और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ हैं. ग्रुप कैप्टन आशुतोष दीक्षित को मिराज-2000 स्क्वाड्रन को ‘बेस्ट’ बनाने और जगुआर व मिग-27 के स्वदेशी अपग्रेड प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) से सम्मानित किया गया. उन्होंने MMRCA प्रोजेक्ट के डायरेक्टर के रूप में 6 विदेशी फाइटर जेट्स के जटिल फील्ड ट्रायल्स को रिकॉर्ड समय में पारदर्शी तरीके से पूरा कर IAF की परिचालन क्षमता में काम किया.
