बिहार में उप-चुनाव हो रहा है, लेकिन माहौल आम चुनाव वाला है। राज्य या देश के किसी कोने से कोई भी सोमवार को पटना आया हो, तो उसे यह शिद्दत से महसूस हुआ होगा। पिछले 10-15 दिनों में केंद्र सहित राज्य के दिग्गज नेताओं को लोगों ने पटना की सड़कों पर खाक छानते देखा। सोमवार को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, राष्ट्रीय जनता दल के मौजूदा निर्णायक तेजस्वी यादव को रोड शो में, जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर को सभा और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लंबे समय बाद वीडियो संदेश के रूप में देखा गया। 30 जुलाई को होने वाले चुनाव के लिए इनमें से केवल प्रशांत किशोर चुनावी मैदान में हैं, लेकिन देश स्तर पर नामी बाकी पांच नेताओं की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। सभी अपने प्रत्याशी का नाम ले रहे हैं, लेकिन चर्चा इन्हीं की चल रही है। कैसे-क्यों? समझते हैं एक-एक नाम के साथ। बांकीपुर विधानसभा उप चुनाव में कुल 25 प्रत्याशी मैदान में हैं। कुल 57 नामांकन दाखिल हुए थे, जिनमें भाजपा के अभिषेक बंटी ने नाम वापस लेकर सुर्खियां हासिल की थी। इसके अलावा तेज प्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल प्रत्याशी वीणा मांडवी नामांकन के बाद गिरफ्तार होकर चर्चित हुई थीं और बाद में तकनीकी कारणों से उनका पर्चा रद्द हो गया था। कुल 25 प्रत्याशियों में सबसे ज्यादा चर्चित नाम जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर का है। उसके बाद दूसरा चर्चित नाम पिछली बार इस सीट से नितिन नवीन से मुकाबिल होकर हारीं रेखा कुमारी गुप्ता का है। वह कांग्रेस से ऐन मौके पर राजद में आकर पिछले चुनाव में प्रत्याशी बनी थीं। इस बार भी राजद ने उन्हें मौका दिया। तीसरा नाम नीरज कुमार सिन्हा का है। यह नाम चर्चा में इसलिए आया, क्योंकि अभिषेक बंटी ने नामांकन के बाद नाम वापसी की घोषणा की और तब भाजपा ने तत्काल नीरज कुमार सिन्हा को अपना प्रत्याशी घोषित किया था। इनके अलावा, एक नाम और है तनवीर आलम। यह पशुपति कुमार पारस की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के प्रत्याशी हैं। इन चार नामों के अलावा, कुल 21 नाम और हैं जो ईवीएम पर नजर आएंगे। इनमें आठ निर्दलीय और बाकी छोटे दलों के हैं। नितिन नवीन। अगर बांकीपुर उप चुनाव में सबसे बड़ी प्रतिष्ठा का सवाल है तो वह नितिन नवीन का ही नाम है। इस क्षेत्र से 31 साल पहले नवीन किशोर सिन्हा ने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की थी। तब इसका नाम पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र था। यह सीट उसके बाद 2005 में उनके जीवन के अंतिम चुनाव तक उनके पास रही। इस सीट पर उनके जनाधार का आलम यह था कि उनकी जीत के अंतर जितने वोट भी दूसरे को हासिल नहीं हुए थे। 2005 के अंत में दिल्ली में उनकी रहस्यमयी मौत हुई तो अगले साल उप चुनाव में बेटे नितिन नवीन ने भाजपा से चुनाव जीता। दो साल बाद परिसीमन में सीट का नाम बांकीपुर हुआ तो भी विधायक कभी नहीं बदला। 2025 के विधानसभा चुनाव तक वह लगातार जीते और फिर भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद राज्यसभा चले गए। इसी से यह सीट खाली हुई। अब यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की छोड़ी सीट है। 31 साल से भाजपा के अभेद्य किले वाली सीट है। दिवंगत नवीन किशोर सिन्हा की विरासत वाली सीट है। इसलिए, नितिन नवीन की प्रतिष्ठा यहां दांव पर है। यही कारण है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के बावजूद वह लगातार इस सीट पर प्रचार के लिए आ रहे हैं। प्रत्याशी उनके क्षेत्र का सामान्य कार्यकर्ता रहा है तो इस बार वह उसके लिए जी-जान लगा रहे हैं। प्रचार खत्म होने के अंतिम समय तक वह मैदान में हैं। कल जनसंपर्क और फिर वोट डालने के लिए भी वह रहेंगे।
