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सी-सेक्शन, उच्च जोखिम गर्भावस्था, टीबी स्क्रीनिंग और एचपीवी टीकाकरण की हुई समीक्षा।

किशनगंज  जिले में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति बढ़ते भरोसे के बीच अस्पतालों में मरीजों की संख्या और जांच सेवाओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और परिणाम आधारित बनाने के उद्देश्य से जिला पदाधिकारी नवीन कुमार की अध्यक्षता में गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सदर अस्पताल की कार्यप्रणाली, चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों की उपलब्धता, अनावश्यक रेफरल रोकने, सी-सेक्शन सेवाओं को बढ़ाने, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान, टीबी एवं गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग, परिवार नियोजन और एचपीवी टीकाकरण समेत विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की बिंदुवार समीक्षा की गई। बैठक में अस्पतालों में उपलब्ध सेवाओं के उपयोग से जुड़े आंकड़ों की भी समीक्षा की गई। आंकड़े बताते हैं कि जून की तुलना में जुलाई में ओपीडी, आईपीडी और एक्स-रे जैसी सेवाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं का मूल्यांकन केवल लक्ष्य और रिपोर्ट के आधार पर नहीं, बल्कि मरीजों को मिल रही वास्तविक सुविधा और उपचार के परिणामों के आधार पर किया जाएगा। जुलाई में ओपीडी 53 हजार के पार, एक्स-रे जांच में दोगुने से अधिक वृद्धि समीक्षा के दौरान सामने आए आंकड़ों के अनुसार जून माह में जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में 42,820 ओपीडी दर्ज हुई थी, जो जुलाई में बढ़कर 53,043 हो गई। अगस्त में 10 तारीख तक ही 16,826 ओपीडी दर्ज की जा चुकी है। इसी तरह आईपीडी में जून में 2,363, जुलाई में 2,887 और अगस्त की 10 तारीख तक 1,041 मरीज दर्ज हुए।जांच सेवाओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। जून में 7,104 एक्स-रे किए गए थे, जबकि जुलाई में यह संख्या बढ़कर 14,265 हो गई। अगस्त की 10 तारीख तक 5,225 एक्स-रे किए जा चुके हैं। सिटी स्कैन की संख्या जून में 929, जुलाई में 928 और अगस्त की 10 तारीख तक 323 रही। अल्ट्रासाउंड जांच जून के 79 से बढ़कर जुलाई में 286 हो गई, जबकि अगस्त की 10 तारीख तक 139 अल्ट्रासाउंड किए जा चुके हैं। प्रसव और नवजात सेवाओं को मजबूत करने पर जोर मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा में जून में 441 प्रसव, जुलाई में 535 और अगस्त की 10 तारीख तक 248 प्रसव दर्ज किए गए। वहीं एसएनसीयू में जून में 59, जुलाई में 76 तथा अगस्त की 10 तारीख तक 25 नवजातों का उपचार किया गया।जिला पदाधिकारी ने उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की समय पर पहचान और प्रखंड स्तर तक उसकी लगातार निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। गर्भवती महिलाओं का विवरण व्यवस्थित रूप से दर्ज करने, संभावित प्रसव तिथि के आधार पर महीनेवार निगरानी तथा आवश्यकता के अनुसार समय रहते संस्थागत उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। सी-सेक्शन सेवाओं को मजबूत करने और गंभीर मामलों की समय पर पहचान को भी प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया। अनावश्यक रेफरल रोककर सदर अस्पताल की विशेषज्ञ सेवाओं का हो बेहतर उपयोग बैठक का प्रमुख केंद्र सदर अस्पताल रहा। समीक्षा में उपलब्ध मानव संसाधन, विशेषज्ञ चिकित्सकों और जांच सुविधाओं के बेहतर उपयोग पर चर्चा हुई। जिला पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि प्रखंड स्तर से सदर अस्पताल रेफर किए जाने वाले मरीजों को यथासंभव सदर अस्पताल में ही विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराया जाए और अनावश्यक रेफरल को कम किया जाए।उन्होंने कहा कि अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सकीय संसाधनों का अधिकतम उपयोग तभी सार्थक होगा, जब मरीजों को समय पर जांच, विशेषज्ञ परामर्श और उपचार एक ही स्थान पर मिल सके। गंभीर मरीजों के लिए आवश्यक होने पर ही उच्च संस्थानों में रेफरल किया जाए। पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों के कम नामांकन को बैठक में गंभीरता से लिया गया। समीक्षा में सामने आया कि पूरे वर्ष में करीब 110 बच्चों का ही नामांकन हो रहा है, जबकि अपेक्षित लक्ष्य कम से कम 2,000 बच्चों का है। जिला पदाधिकारी ने इस अंतर को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग और आईसीडीएस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया। आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से कुपोषित एवं जरूरतमंद बच्चों की पहचान, परिवारों की काउंसलिंग और एनआरसी में उपलब्ध उपचार एवं पोषण संबंधी सुविधाओं की जानकारी देकर बच्चों को केंद्र तक लाने पर जोर दिया गया। प्रत्येक सोमवार को होने वाली समन्वय बैठकों को अधिक प्रभावी बनाने और संबंधित विभागों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया। टीबी, गैर-संचारी रोग, परिवार नियोजन और एचपीवी टीकाकरण की समीक्षा गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग की समीक्षा के दौरान करीब 8 लाख के लक्ष्य के मुकाबले उपलब्ध लगभग 70 हजार स्क्रीनिंग के आंकड़ों पर जिला पदाधिकारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि केवल स्क्रीनिंग की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि रक्तचाप, रक्त शर्करा सहित आवश्यक स्वास्थ्य सूचनाओं का पूर्ण और गुणवत्तापूर्ण डेटा संधारण भी जरूरी है। नियमित रिपोर्टिंग और आंकड़ों की सत्यता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। परिवार नियोजन पखवाड़े की उपलब्धियों की भी समीक्षा की गई। अपेक्षित उपलब्धि नहीं होने पर समुदाय स्तर पर जागरूकता, परामर्श और परिवार नियोजन सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया। वहीं एचपीवी एवं गार्डसिल टीकाकरण की समीक्षा में दो प्रखंडों में कार्य शेष रहने तथा 535 मामले लंबित होने की जानकारी दी गई। संबंधित अधिकारियों को अभियान में तेजी लाकर लंबित मामलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। अस्पतालों में दुर्घटना से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई। जून में 8,746, जुलाई में 8,719 और अगस्त की 10 तारीख तक 2,617 एक्सीडेंट केस दर्ज किए गए। बड़ी संख्या में दुर्घटना पीड़ितों के अस्पताल पहुंचने को देखते हुए समय पर जांच, प्राथमिक उपचार, आवश्यक विशेषज्ञ सेवाएं और जरूरत पड़ने पर उचित रेफरल की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं और अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि यह देखा जाए कि अस्पताल पहुंचने वाले मरीज को वास्तव में कितनी जल्दी जांच, उपचार, दवा और विशेषज्ञ सेवा मिल रही है। उन्होंने कहा कि “हर मरीज को सम्मान के साथ समय पर उपचार मिलना चाहिए। उपलब्ध संसाधनों और विशेषज्ञ सेवाओं का बेहतर उपयोग करते हुए अनावश्यक रेफरल को कम करना हमारी प्राथमिकता है। स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ जिले के अंतिम छोर पर रहने वाले व्यक्ति तक भी पहुंचे, इसके लिए विभागीय समन्वय और जवाबदेही दोनों जरूरी हैं। जिला पदाधिकारी ने अधिकारियों से अपील की कि स्वास्थ्य कार्यक्रमों को केवल लक्ष्य पूरा करने की दृष्टि से नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में वास्तविक सुधार लाने के उद्देश्य से संचालित किया जाए। उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीबी उन्मूलन, गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग, पोषण, टीकाकरण और परिवार नियोजन जैसी सेवाओं की पहुंच गांव-गांव और अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित की जानी चाहिए। बैठक में स्पष्ट किया गया कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाले प्रत्येक मरीज को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति अब केवल कागजी आंकड़ों से नहीं, बल्कि मरीजों को मिले उपचार, सुविधा की उपलब्धता और स्वास्थ्य परिणामों से आंकी जाएगी।
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