दिल्ली में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन होने जा रहा है. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियों के बीच विदेशी मेहमानों के लिए लग्जरी वाहनों की मांग अचानक काफी बढ़ गई है. राष्ट्राध्यक्षों, राजनयिकों और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के आने-जाने के लिए मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी, रेंज रोवर और रोल्स-रॉयस जैसी गाड़ियों की बड़े पैमाने पर जरूरत पड़ रही है. दिल्ली में पर्याप्त संख्या में ऐसी व्यावसायिक गाड़ियां उपलब्ध नहीं होने के कारण अब दूसरे शहरों से वाहन मंगाए जा रहे हैं. टूर एंड ट्रैवल क्षेत्र से जुड़े लोगों के पता चला कि ब्रिक्स सम्मेलन के लिए लग्जरी वाहनों की मांग 500 से ज्यादा पहुंच गई है. इसमें सुपर-लग्जरी कारों के साथ इनोवा क्रिस्टा और फॉर्च्यूनर जैसी गाड़ियों की भी बड़ी संख्या में जरूरत है. अलग-अलग दूतावासों के माध्यम से वाहन उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है. एक दूतावास से करीब पांच से 10 लग्जरी वाहनों की मांग आ रही है. इंडियन टूरिस्ट ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश सेहरावत के अनुसार, सम्मेलन के लिए आई भारी मांग को पूरा करने में दिल्ली का मौजूदा लग्जरी टैक्सी बेड़ा पर्याप्त नहीं है. यही वजह है कि टूर ऑपरेटर अब आगरा, जयपुर, चंडीगढ़ और देहरादून जैसे शहरों से गाड़ियां दिल्ली ला रहे हैं. इन शहरों में उपलब्ध हाई-एंड वाहनों को सम्मेलन के दौरान विदेशी मेहमानों और उनके काफिलों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. इनमें रोल्स-रॉयस, रेंज रोवर और मर्सिडीज की महंगी सीरीज की गाड़ियां भी शामिल हैं. दिल्ली में लग्जरी टैक्सियों की उपलब्धता कम होने की एक बड़ी वजह व्यावसायिक वाहनों पर लागू गति सीमा भी बताई जा रही है. सेहरावत के मुताबिक, दिल्ली में कमर्शियल टैक्सी और कैब में स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य है. इससे इन वाहनों की अधिकतम गति 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक सीमित हो जाती है. वहीं, वीवीआईपी और राष्ट्राध्यक्षों के सुरक्षा काफिले के लिए अलग तरह की परिवहन व्यवस्था की जरूरत होती है. सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार काफिलों को कई मौकों पर तेज गति से भी आगे बढ़ना पड़ सकता है. ऐसे में दिल्ली में पंजीकृत कुछ लग्जरी टैक्सियां इन जरूरतों के अनुरूप नहीं बैठतीं. इसके अलावा सुपर-लग्जरी वाहनों के व्यावसायिक पंजीकरण से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक शर्तें भी राजधानी में इनकी संख्या सीमित करती हैं. मांग बढ़ने के बाद दिल्ली के टूर एंड ट्रैवल ऑपरेटरों ने आसपास के प्रमुख शहरों में संपर्क बढ़ा दिया है. आगरा, जयपुर, चंडीगढ़ और देहरादून से लग्जरी वाहनों की बुकिंग की जा रही है. इससे सम्मेलन के दौरान वाहनों की जरूरत पूरी करने में दूसरे शहरों की कंपनियों और ऑपरेटरों की भूमिका भी बढ़ गई है. ऑपरेटरों के मुताबिक, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के लिए समय पर वाहनों की व्यवस्था करना प्राथमिकता है. इसलिए सम्मेलन से पहले ही गाड़ियों और चालकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है. विदेशी मेहमानों की सुरक्षा को देखते हुए सिर्फ वाहन उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है. गाड़ियों के साथ उनके चालकों का भी पुलिस सत्यापन किया जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियां वाहन और चालक से जुड़ी जानकारी की जांच के बाद ही उन्हें वीवीआईपी ड्यूटी में लगाएंगी. चालकों को भी विशेष निर्देश दिए गए हैं. उन्हें विदेशी प्रतिनिधियों से अनावश्यक बातचीत नहीं करने और किसी भी जरूरी जानकारी या समस्या के लिए सीधे संबंधित कोऑर्डिनेटर से संपर्क करने को कहा गया है. इस तरह ब्रिक्स सम्मेलन ने दिल्ली के परिवहन और टूरिज्म सेक्टर के सामने बड़ी मांग खड़ी कर दी है. राजधानी में उपलब्ध संसाधनों के साथ अब आसपास के शहरों से लग्जरी वाहनों को जोड़कर विदेशी मेहमानों के लिए परिवहन व्यवस्था तैयार की जा रही है.
