पटना। बिहार जनता दल (यू0) प्रदेश कार्यालय, पटना में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम में बिहार सरकार के मा0 उपमुख्यमंत्री श्री विजय कुमार चैधरी एवं बिहार सरकार की मा0 मंत्री श्रीमती शीला मंडल ने प्रदेशभर से आए फरियादियों की समस्याएं सुनीं एवं उनके निष्पादन हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसके उपरांत मा0 श्री विजय कुमार चैधरी ने प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि फरक्का जल संधि और फरक्का बैराज से जुड़़़े बिहार के हितों के मुद्दे पर जदयू द्वारा गंगा बेसिन के जिलों में ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत मा0 राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय कुमार झा एवं मा0 प्रदेश अध्यक्ष श्री उमेश सिंह कुशवाहा विभिन्न जिलों में लोगों से संवाद कर रहे हैं। मा0 राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नीतीश कुमार भी विभिन्न अवसरों पर अनेक मंचों से फरक्का के कारण बिहार पर पड़़ रहे दुष्प्रभावों तथा राज्य के जल हितों से जुड़़े मुद्दों को मजबूती से उठाते रहे हैं। श्री चैधरी ने कहा कि वर्ष 1996 में जब फरक्का जल संधि हुई, उस समय केंद्र में यूपीए सरकार और बिहार में लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व वाली सरकार थी। दोनों सरकारों ने बिहार के हितों की अनदेखी करते हुए राज्य के साथ अन्याय किया। आज जदयू द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान का परिणाम है कि जो राजनीतिक दल संधि के समय इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए थे, वे भी अब फरक्का जल संधि के विरोध में आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि फरक्का बैराज के कारण गंगा नदी में गंभीर रूप से सिल्ट जमा हुआ है, जिससे गंगा उथली हो गई है। इससे गंगा की प्राकृतिक धारा प्रभावित हुई और गंगा बेसिन के इलाकों में बाढ़़़ एवं कटाव की स्थिति गंभीर होती चली गई। हाल ही में भागलपुर जिले के खरीक प्रखंड में गंगा की धारा बदलने के कारण भीषण कटाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। वरीय अधिकारियों द्वारा वहां एक सप्ताह तक कैंप कर युद्धस्तर पर कटावरोधी कार्य कराया गया और बांध को सुरक्षित किया गया। मा0 उपमुख्यमंत्री ने कहा कि फरक्का जल संधि की शर्तों को पूरा करने के लिए बिहार को लीन पीरियड में 1500 क्यूमेक पानी छोड़़़़ना पड़़ता है, जिसके कारण राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। जबकि यह भी तथ्य है कि गंगा में सबसे अधिक जल बिहार की सहायक नदियों के माध्यम से ही पहुंचता है। ऐसे में बिहार के जल हितों को प्राथमिकता दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हाल ही में मा0 मुख्यमंत्री श्री सम्राट चैधरी, मा0 राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय कुमार झा एवं अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ भारत सरकार के मा0 विदेश मंत्री, मा0 वित्त मंत्री एवं मा0 जल संसाधन मंत्री के समक्ष फरक्का से जुड़़़े बिहार के जल हितों को मजबूती से रखा गया। केंद्र सरकार की ओर से आश्वस्त किया गया है कि फरक्का से जुड़़़े विषयों पर बिहार के हितों का पूरा-पूरा ध्यान रखा जाएगा। श्री चैधरी ने स्पष्ट कहा कि लीन पीरियड में बिहार से 1500 क्यूमेक पानी छोड़़़ने की बाध्यता समाप्त की जानी चाहिए। इस पानी का उपयोग बिहार में औद्योगिक विकास, पेयजल और सिंचाई जैसी आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार की पहल पर ही केंद्र सरकार की ओर से ‘नेशनल सिल्ट मैनेजमेंट पाॅलिसी’ का फ्रेमवर्क तैयार किया गया है, जिस पर आगे की कार्रवाई चल रही है। इस मौके पर विधान परिषद में सत्तारूढ़़़़ दल के मुख्य सचेतक श्री संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी, प्रदेश महासचिव सह मुख्यालय प्रभारी श्रीमती अंजुम आरा एवं डाॅ0 अमरदीप मौजूद रहे।
