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गोवा: लिस्ट में 97 वोटरों के नाम शामिल न होने पर सफाई, अधिकारी बोले- कई लोगों को जोड़ा गया, कोई छुटेगा नहीं

इन दिनों देश में विशेष गहन पुनरीक्षण का मुद्दा गरमाया हुआ है. गोवा में विशेष गहन पुनरीक्षण  के बाद फरवरी में प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 97 योग्य मतदाताओं के नाम शामिल नहीं होने की खबरों पर मचे बवाल के बाद अब राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी का बयान सामने आया है. उन्होंने सफाई देते हुए कहा है कि फरवरी में जारी हुई अंतिम मतदाता सूची से छूटे 97 मतदाताओं में से कई लोगों को अब सूची में शामिल कर लिया है. इसके साथ ही बाकी मामलों पर प्रक्रिया तेजी से चल रही है. दरअसल, SIR के दौरान कुछ मतदाताओं के नामों में तार्किक विसंगतियां सामने आई थीं. ऐसे मतदाताओं को अपने दस्तावेज जमा करने और आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया गया था. इसके बाद गोवा में 649 मतदाता सामने आए. चुनाव पंजीकरण अधिकारियों और सहायक चुनाव पंजीकरण अधिकारियों ने इन मामलों की जांच की. मामलों की जांच के बाद, अधिकारियों ने 97 लोगों को मतदाता सूची में शामिल करने के योग्य पाया. रिपोर्ट के अनुसार, गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने 11 से 17 फरवरी के बीच 8 पत्र भेजकर निर्णय को पलटने और इन नामों को शामिल करने की अनुमति देने का अनुरोध किया. हालांकि, ऐसा नहीं हुआ और 21 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में इन 97 मतदाताओं के नाम शामिल नहीं गुरुवार को सीईओ के कार्यालय ने कहा कि कई नामों को शामिल किया गया है. कार्यालय ने कहा कि ‘फरवरी 2026 में प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए 97 मामलों को बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा घर-घर जाकर फॉर्म 6 भरने के लिए अलग से संसाधित किया गया. इनमें से कई लोगों का नामांकन हो चुका है, जबकि शेष मामलों पर कार्रवाई जारी है. यह दोहराया जाता है कि कोई भी पात्र मतदाता पीछे नहीं छूटेगा’.मतदाताओं को सूची में शामिल न किए जाने से मतदाता सूचियों के केंद्रीकरण पर सवाल उठे, जिसे चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने भी उठाया. इधर गोवा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सुनील कावथंकर ने कहा कि बीजेपी SIR के जरिए चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है क्योंकि उसे पता है कि उसे राज्य में दोबारा सत्ता नहीं मिलेगी. उन्होंने इस प्रक्रिया को वापस लेने की मांग की.उन्होंने कहा ‘वैध मतदाताओं के नाम हटाना साजिश के बराबर है. भारत निर्वाचन आयोग बीजेपी का हथियार बन गया है, जिसका इस्तेमाल वे चुनाव जीतने के लिए कर रहे हैं. कांग्रेस को देशभर में मिल रहे समर्थन से भाजपा घबरा गई है. इसीलिए वे इस तरह की चालों से चुनाव जीतने की कोशिश कर रहे हैं’.वहीं बीजेपी ने विपक्ष के दावों को बदनामी का अभियान बताकर खारिज कर दिया है और कहा है कि कांग्रेस इसलिए निराश है क्योंकि लोग पार्टी को वोट नहीं दे रहे हैं और वह चुनाव जीतने में सक्षम नहीं हो पा रही है. विपक्ष द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों में से एक यह है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत अब तक 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जो भारत के कुल मतदाताओं का लगभग 14% है. दिल्ली में नाम हटाने का प्रतिशत सबसे अधिक रहा है, जहां 32.8%, यानी SIR से पहले के लगभग एक तिहाई मतदाताओं को मसौदा सूची से बाहर कर दिया गया है.

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