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भाकपा जन संगठनों के 28 सितंबर के आक्रोशपूर्ण राजभवन मार्च का करेगी समर्थन

पटना। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी बिहार राज्य परिषद की बैठक शनिवार को जनशक्ति भवन पटना में हुई। बैठक में बाढ़-सूखा के स्थाई निदान, केंद्र और राज्य सरकार की जन विरोधी नीतियों, बिहार में बढ़ते अपराध, भ्रष्टाचार, अत्याचार और भाजपा सरकार की बुलडोजर नीति के खिलाफ जन संगठनों के आह्वान पर शहीद ए आजम भगत सिंह की जयंती के मौके पर 28 सितंबर 2026 को पटना में आयोजित आक्रोशपूर्ण राजभवन मार्च को समर्थन देने का निर्णय लिया गया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के मौके पर 02 अक्टूबर 2026 को सांप्रदायिक सद्भाव दिवस के रूप में मनाने,07 नवंबर 2026 को क्रांति दिवस मनाने और ‘बदलाव जरूरी है’ नारे के साथ 01 से 03 दिसंबर 2026 तक जेल भरो कार्यक्रम के तहत जेल भरने का निर्णय लिया गया। बैठक में बिहार में आई बाढ़ पर प्रस्ताव पारित कर बाढ़-सुखा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग गई। बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सचिव डा. गिरीश चंद्र शर्मा ने कहा कि देश आर्थिक संकट की दौर से गुजर रहा है। देश की जनता महंगाई से त्रस्त हैं। उपभोक्ता वस्तुओं की कीमत आसमान छू रही है। डीजल-पेट्रोल और गैस की कीमत बार बार बढ़ाकर जनता पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के आगे घुटना टेक चुके हैं। उन्होंने कहा कि भाकपा 7 नवंबर को ‘क्रांति दिवस’ के रूप में मनाएगी। यह दिन दुनिया भर के मुक्ति संघर्षो और क्रांतिकारी आंदोलनों में कम्युनिस्टों की ऐतिहासिक भूमिका को स्मरण किया जायेगा, जिसमें भारत के स्वतंत्रता संग्राम और लोकतांत्रिक रूपांतरण में कम्युनिस्टों का योगदान भी शामिल है। इस दिन का उपयोग जनता, विशेषकर युवा पीढ़ी के बीच कम्युनिस्ट आंदोलन की क्रांतिकारी और लोकतांत्रिक विरासत को लोकप्रिय बनाने के लिए किया जाएगा। मोदी सरकार में देश के सामने मौजूद अभूतपूर्व आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों के मद्देनजर, भाकपा ‘बदलाव जरूरी है’ के नारे के साथ 1, 2 और 3 दिसंबर 2026 को देशव्यापी ‘जेल भरो आंदोलन’ करेगी। पार्टी ने मोदी सरकार की विनाशकारी नीतियों के खिलाफ गिरफ्तारी देने के लिए कम से कम पांच लाख कामरेडों को लामबंद करने का लक्ष्य रखा है। आंदोलन में मजदूरों,-किसानों, युवाओं, छात्रों, महिलाओं और-समाज के अन्य वर्गो को प्रभावित करने-वाले मुद्दों को उठाया जायेगा और बुनियादी राजनीतिक व नीतिगत बदलाव की मांग को तेज किया जायेगा। भाकपा राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने कहा कि मॉब लिन्चिंग, एनकाउंटर और बुलडोजर से ध्वस्तीकरण की कई घटनाएँ इस बात का संकेत है कि भाजपा की नई नवेली सरकार असहमति की आवाज को कुचलने, अल्पसंख्यकों के अन्दर भय व दहशत पैदा करने तथा भूमिहीन गरीब किसानों की कीमत पर कारपोरेट घरानों के लिए अवसर मुहैया कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सेटेलाईट टाऊनशीप योजना इसी का एक नमूना है। इस योजना के तहत बिहार के 11 जिलों के लगभग दो लाख एकड़ जमीन पर तलवार लटक रही है। डीजल-पेट्रोल, रसोई गैस की मूल्य वृद्धि से महंगाई और बढ़ गई है। घपला-घोटाला और भ्रष्टाचार के नित्य नये मामले उजागर हो रहे हैं। बेरोजगारी और पलायन से युवा परेशान हैं। कृषि और किसानों का संकट बढ़ गया है। मनरेगा के समाप्त हो जाने से दलितों-गरीबों के समक्ष रोजगार और न्यूनतम मजदूरी का नया संकट उत्पन्न हो गया है। आंगनबाड़ी, आशाकर्मी, रसोईया, निर्माण कामगार, वित्त रहित कर्मी सहित समस्त स्कीम वर्कर, ठेका अनुबंध के बदले अपनी सेवा नियमित करने हेतु संघर्षरत है। चार श्रम संहिताओं के जरिए मजदूरों के हक और अधिकार को छिना जा रहा है। शिक्षा के बाजारीकरण, भगवाकरण तथा बार-बार प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लिक होने की घटनाओं से छात्र और शिक्षा का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। महिला उत्पीड़न की घटनाएँ बढ़ रही है तथा संसद-विधानसभाओं में महिला आरक्षण को बार-बार लटकाया जा रहा है। संयुक्त संघर्ष और आंदोलन को तेज करना आज की राजनीतिक आवश्यकता है। इसी के मद्देनजर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की बिहार राज्य परिषद ने विभिन्न जनसंगठनों, किसान सभा, खेत मजदूर यूनियन, ट्रेड यूनियन, महिला समाज, यूथ फेडरेशन, स्टुडेन्ट्स फेडरेशन, तंजीमें-ए-इंसाफ आदि विभिन्न जनसंगठनों के 28 सितंबर 2026 को राजभवन के समक्ष आयोजित संयुक्त मार्च का पार्टी पुरजोर समर्थन करती है। बैठक को राज्य सचिवमंडल सदस्य सुरेन्द्र सौरभ, रामचन्द्र महतो, गजनफर नबाब , जानकी पासवान, बिहार महिला समाज की महासचिव राजश्री किरण आदि नेताओं ने संबोधित किया। बैठक की अध्यक्षता ओमप्रकाश नारायण और प्रभाशंकर सिंह की अध्यक्षमंडली ने की।

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