पटना,इस बार दुर्गा पूजा (पूजो) के दिन परिवारों के मिलने, पंडाल घूमने, स्थानीय पकवानों का मजा लेने और संगीत व उत्सवों से मोहल्लों में रौनक के रहे। इन परंपराओं ने लोगों को आपस में जोड़ा, जिससे उन्हें अपनों से फिर मिलने और यहां की समृद्ध संस्कृति व खान-पान का साथ मिलकर लुत्फ उठाने का मौका मिला। त्योहारों के इस मौसम में कोका-कोला इंडिया ने अलग-अलग बाजारों में कई सांस्कृतिक अनुभवों के जरिए अपने ड्रिंक्स पोर्टफोलियो को ग्राहकों के और करीब पहुंचाया। ये पहल रिहायशी इलाकों, पसंदीदा फूड सेंटर्स और पूजा पंडालों में शुरू की गईं, जिनका मकसद लोगों के त्योहार मनाने के खास लम्हों और परंपराओं का हिस्सा बनना था। कोका-कोला इंडिया एंड साउथवेस्ट एशिया के इंटीग्रेटेड ऑपरेशन्स के वाइस प्रेसिडेंट संदीप बजोरिया ने कहा, “त्योहारों का मौसम पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं के साथ परिवारों और समुदायों को एक साथ लाता है। उत्सव के ये पल हमारे लिए उपभोक्ताओं से जुड़ने का अहम मौका हैं। इस दौरान हम यह भी पक्का करते हैं कि त्योहार का मजा लेते हुए उनके शरीर में पानी की कमी न हो और वे तरोताजा रहें। कोका-कोला इंडिया में हमारा ध्यान इन रिश्तों को और गहरा करने पर है। इसके लिए हम अपने विविध ड्रिंक्स पोर्टफोलियो को स्थानीय समझ से जोड़ते हैं, और बड़े डिस्ट्रीब्यूशन, रिटेल व बॉटलिंग नेटवर्क के सहारे जमीन पर मजबूत अमल करते हैं।” कई परिवारों के लिए त्योहार की शुरुआत अपने प्रियजनों के घर लौटने के साथ हुई। इन मुलाकातों के मौके पर भारत के घरेलू बिलियन-डॉलर ब्रांड माज़ा ने पश्चिम बंगाल के रिहायशी इलाकों में फेस्टिव इंस्टॉलेशन और फोटो प्वाइंट्स बनाए। इसके साथ ही ब्रांड ने कोलकाता मिक्सोलॉजी के जरिए त्योहार के जश्न में एक ताजगी भरा ट्विस्ट जोड़ा। इसमें लोगों के चखने के लिए माज़ा से बनी खास मॉकटेल्स रखी गईं। माज़ा ने माज़ा आमंत्रण के जरिए बंगाल की न्योता देने की पुरानी परंपरा को भी जीवंत कर दिया। रिटेल आउटलेट्स, अस्थायी फेस्टिव स्टॉलों और क्विक-कॉमर्स पर ड्रिंक्स उपलब्ध कराए गए, ताकि लोग दुर्गा पूजा के दौरान साथ मिलकर जश्न मनाते हुए अपने पसंदीदा ड्रिंक्स का आनंद ले सकें। खाना बंगाल की त्योहार संस्कृति का बेहद अहम हिस्सा है, जहां स्थानीय पकवानों के बहाने लोग साथ बैठकर खाते हैं, बातें करते हैं और यादें ताजा करते हैं। ‘लाल मेझे’ के जरिए कोका-कोला ने कोलकाता की ‘अड्डा’ की इस पुरानी परंपरा को समेटा। पंडाल घूमने, खाने-पीने और उत्सवों के साथ-साथ दोस्तों, परिवार और पुराने परिचितों के साथ अचानक होने वाली मुलाकातें भी इस त्योहार का उतना ही प्यारा हिस्सा बनी रहीं। ‘लाल मेझे’ के लिए खास अड्डा जगहें तय करके कोका-कोला ने इस परंपरा को त्योहार के जश्न में शामिल किया।
