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उपसभापति हरिवंश ने भारतीय लोकतंत्र के 75 वर्षों पर आधारित ऐतिहासिक पुस्तक तथा दो शोध पत्रिकाओं का विमोचन किया

राज्यसभा के माननीय उपसभापति श्री हरिवंश ने नई दिल्ली स्थित अपने सरकारी आवास में भारतीय लोकतंत्र के 75 साल: तथ्यों और आंकड़ों में भारतीय चुनाव की कहानी (1950–2025) पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने दो त्रैमासिक शोध पत्रिकाओंइंडियन जर्नल ऑफ इलेक्टोरल स्टडीज़ (IJES) तथा इंडियन जर्नल ऑफ सोशियोइकोनॉमिक स्टडीज़ (IJSES)के प्रथम अंकों का भी विमोचन किया। इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए श्री हरिवंश ने गंभीर शोधप्रलेखन तथा साक्ष्यआधारित अध्ययन को प्रोत्साहित करने वाली ऐसी पहलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत के लोकतांत्रिक विकास का समग्र दस्तावेजीकरण करने वाले प्रकाशन शोधकर्ताओंनीतिनिर्माताओं तथा भावी पीढ़ियों के लिए अत्यंत उपयोगी संदर्भ सामग्री सिद्ध होंगे। सात दशकों से अधिक की निर्वाचन संबंधी जानकारी को एक ही ग्रंथ में समाहित कर यह प्रकाशन भारत की लोकतांत्रिक विरासत के संरक्षण के साथसाथ गंभीर शोध एवं जनजागरूकता को भी सुदृढ़ करता है। इंडियास्टैट पब्लिकेशन्स के निदेशक तथा पुस्तक एवं दोनों शोध पत्रिकाओं के संपादक डॉआरकेठुकराल ने कहा कि यह पहल शोध समुदायनीतिनिर्माताओंशैक्षणिक संस्थानों तथा आम पाठकों के लिए प्रामाणिक निर्वाचन एवं सामाजिकआर्थिक आँकड़ों तथा शोध सामग्री को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने इन प्रकाशनों के विमोचन तथा अकादमिक एवं शोधपरक पहलों को प्रोत्साहन देने के लिए श्री हरिवंश नारायण सिंह के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। इंडियास्टैट पब्लिकेशन्स द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक वर्ष 1950 से 2025 तक भारत की लोकतांत्रिक एवं निर्वाचन यात्रा का व्यापकतथ्यपरक और प्रामाणिक दस्तावेज प्रस्तुत करती है। इसमें आम चुनावों के सांख्यिकीय आँकड़ेऐतिहासिक घटनाक्रमनिर्वाचन क्षेत्रवार जानकारीविषयगत विश्लेषणमानचित्र तथा चित्रात्मक प्रस्तुतियाँ सम्मिलित हैं। यह भारतीय लोकतंत्र से संबंधित निर्वाचन आँकड़ों एवं तथ्यात्मक जानकारी के सबसे व्यापक संकलनों में से एक है। पुस्तक में 1951–52 के प्रथम आम चुनाव से लेकर प्रत्येक लोकसभा चुनाव का विवरण तथा 1950 से 2025 तक के प्रमुख संवैधानिकसंस्थागत एवं राजनीतिक विकास का क्रमबद्ध आलेखन किया गया है। इसकी समसामयिक उपयोगिता बनाए रखने के लिए इसमें जनवरी से जून 2026 के दौरान हुए महत्वपूर्ण निर्वाचन एवं राजनीतिक घटनाक्रमों को समाहित करते हुए एक परिशिष्ट (Addendum) भी जोड़ा गया हैजिससे यह भारत के निर्वाचन इतिहास का एक अद्यतन एवं प्रामाणिक संदर्भ ग्रंथ बन गया है। इंडियन जर्नल ऑफ इलेक्टोरल स्टडीज़ निर्वाचन प्रणालीलोकतांत्रिक संस्थाओंनिर्वाचन प्रशासनराजनीतिक भागीदारीमतदान व्यवहारनिर्वाचन सुधारों तथा तुलनात्मक निर्वाचन अध्ययनों पर शोध के लिए एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराती है। वहीं इंडियन जर्नल ऑफ सोशियोइकोनॉमिक स्टडीज़ भारत की अर्थव्यवस्थासमाजशासनलोकनीति तथा सतत विकास से जुड़े विषयों पर साक्ष्यआधारित शोध को प्रोत्साहित करती है। यह पुस्तक और दोनों शोध पत्रिकाएँ मिलकर विश्वसनीय आँकड़ों एवं उच्च गुणवत्ता वाले शोध को संसद सदस्योंनीतिनिर्माताओंनिर्वाचन प्रशासकोंशोधकर्ताओंशिक्षाविदोंविद्यार्थियोंपत्रकारों तथा भारत के लोकतांत्रिक एवं विकासात्मक अध्ययन में रुचि रखने वाले सभी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास हैंजिससे सार्थक जनविमर्शनीतिनिर्माण तथा अकादमिक अनुसंधान को नई दिशा मिल सके।

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