पटना। जद (यू) विधान पार्षद सह मुख्य प्रदेश प्रवक्ता श्री नीरज कुमार, प्रदेश प्रवक्ता डा0 अनुप्रिया यादव एवं प्रदेश प्रवक्ता श्री चंदन कुमार सिंह ने संयुक्त रुप से प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने बिहार में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सम्राट-निशांत माॅडल की चर्चा करते हुए कहा कि माननीय श्री नीतीश कुमार द्वारा सात निश्चय 3 के तहत लिए गए निर्णयों को लागू करने के संबंध में माननीय श्री निशांत कुमार द्वारा क्रांतिकारी फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 8 मई को स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर पदभार संभालने के बाद महज 104 दिन में ही माननीय श्री निशांत कुमार ने मरीजों के हित में कई फैसले लिए हैं। उन्होंने अनावश्यक तौर पर मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करने की प्रथा को खत्म करने का काम किया साथ ही बेवजह रेफर करने वाले डाॅक्टरों पर कार्रवाई करने का फैसला लिया। वहीं स्वास्थ्य विभाग को मरीजों के प्रति जवाबदेह बनाने का काम किया। जिला अस्पतालों में 36 प्रकार के आॅपरेशन की सुविधा सुनिश्चित करने का फैसला लिया गया। अस्पतालों में डाॅक्टरों, कर्मियों की कमी दूर करने के लिए अनेकों फैसले लिए गए और बेहद कम समय में सैंकड़ों पदों पर भर्तियां की गई। अस्पतालों में वेंटिलेटर, डायलिसिस, मरीजों को 504 तरह की मुफ्त दवाईयां देने का संकल्प, जांच और अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने का काम किया गया जिससे मरीजों को काफी लाभ मिलेगा। राज्य में जानलेवा टीबी के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। पिछले महीने जुलाई की अगर बात करें तो आंकडे़ इस बात की साफ गवाही दे रहे हैं कि 02 जुलाई से 31 जुलाई तक चलाए गए टीबी के खिलाफ अभियान में 1 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 1.90 करोड़ मरीजों की स्क्रीनिंग की गई इसके अलावा रिकाॅर्ड स्तर पर 5.91 लाख मरीजों की एक्स-रे जांच की गई। इसका मतलब साफ है कि बिहार अब बीमारी का इंतजार नहीं कर रहा बल्कि बीमारी को पहचान कर वहां पहुंचने का काम कर रहा है। सम्राट-निशांत की जोड़ी का मूल मंत्र साफ है-नीति स्पष्ट हो, निर्णय तेज हो और उसका परिणाम जमीन पर दिखाई दे। यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग में बदलाव अब केवल सरकारी दावों का विषय नहीं, बल्कि व्यवस्था के स्तर पर महसूस किया जाने लगा है। उन्होंने कहा कि माननीय श्री निशांत कुमार प्रचार से अधिक परिणाम पर भरोसा करते हैं। बिहार में अस्पतालों की क्षमता बढ़ रही है, विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार हो रहा है, दवा और जांच की पहुंच मजबूत हो रही है और अनावश्यक रेफर करने की व्यवस्था खत्म की जा रही है। यह बदलाव केवल संयोग नहीं, बल्कि स्पष्ट नेतृत्व, तेज निर्णय और सक्रिय क्रियान्वयन का परिणाम है।
